इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध-प्रदर्शन अब और तेज होते नजर आ रहे हैं। महंगाई, बिजली संकट और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब पाकिस्तान सरकार (Pakistan Govt) के खिलाफ व्यापक असंतोष का रूप लेता दिख रहा है। इसी बीच ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी के नेताओं ने सरकार को खुली चेतावनी दी है कि वे दबाव में पीछे हटने वाले नहीं हैं।
JAAC पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान प्रशासन ने JAAC पर प्रतिबंध लगाने के साथ उसके कुछ प्रमुख नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की है। संगठन का दावा है कि उसके नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है।
JAAC अध्यक्ष शौकत नवाज मीर ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आंदोलन को देशद्रोह और आतंकवाद से जोड़ना गलत है। उन्होंने बयान में कहा कि वे अपने ऊपर लगाए गए आरोप स्वीकार नहीं करेंगे और आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं, संगठन से जुड़े नेता ख्वाजा मेहरान ने भी प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आंदोलन दबाव या डर से खत्म नहीं होगा।
आर्थिक मुद्दों से शुरू हुआ आंदोलन
PoK में विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत बिजली दरों, महंगाई, आटा और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों को लेकर हुई थी। प्रदर्शनकारी लंबे समय से सब्सिडी, बेहतर सुविधाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठा रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि, अलग-अलग पक्षों की ओर से आंकड़े अलग बताए जा रहे हैं और स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि करना मुश्किल रहा है। स्थिति को लेकर क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
पाकिस्तान सरकार पर बढ़ता दबाव
विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले, तो यह आंदोलन पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकट बन सकता है। फिलहाल PoK में हालात को लेकर नजरें सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के अगले कदम पर टिकी हैं।
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