
इन्दौर। ब्रिक्स सम्मेलन के लिए आए विदेशी मेहमानों में से कल ईरान के कृषि मंत्री ने इंदौर के ऐतिहासिक राजबाड़ा और छत्री को देखा और यहां की संस्कृति के साथ ही राजबाड़ा के आर्किटेक्चर को काफी सराहा।
राजबाड़ा को देखने के लिए एकाएक ये दल यहां कल शाम पहुंचा था। इनके साथ एक ट्रांसलेटर भी था। राजबाड़ा और कृष्णाबाई होलकर की छत्री को लेकर तमाम जानकारी पुरातत्व विभाग के असिस्टेंट क्यूरेटर आशुतोष महाशब्दे ने इंग्लिश में दी, जिसे उन्हें ईरानी में साथ आए ट्रांसलेटर ने बताया।
महाशब्दे ने बताया कि वे राजबाड़ा की यूरोपियन, राजपूताना, मराठा और इस्लामिक शैली की छाप को देखकर खासे प्रभावित हुए। उन्होंने यहां कई तस्वीरें ली और जानकारी लेने के बाद कहा कि दोनों देशों की संस्कृति और सभ्यता कई मामले में मिलती-जुलती हैं। वे भारतीय आर्किटेक्चर से काफी प्रभावित नजर आए। उन्होंने राजबाड़ा के गणेश हॉल को भी देखा, जहां उन्होंने भगवान गणेश के बारे में जानने में उत्सुकता दिखाई। उन्होंने संस्कृति और परंपरा का सम्मान करते हुए यहां प्रवेश से पहले अपने जूते भी उतारे। इसके बाद उन्होंने गैलरी में जाकर होलकरकालीन इतिहास को भी जाना समझा। इसके बाद वे यहां से कृष्णाबाई होलकर की छत्री भी गए और यहां की जानकारी ली।
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