
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल(West Bengal) की सियासत में तृणमूल कांग्रेस(Trinamool Congress) (टीएमसी) के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक(public domain) रूप से सामने आने लगी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee)को लेकर वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी(Kalyan Banerjee) के परिवार की नाराजगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। अधिवक्ता शीर्षाण्य बनर्जी, जो वरिष्ठ टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी के पुत्र हैं, ने दावा किया है कि पेशेवर सम्मान और वकालत की परंपराओं की अनदेखी किए जाने के कारण उन्होंने अभिषेक बनर्जी से जुड़े कानूनी मामलों से खुद को अलग करने का निर्णय लिया है।
शीर्षाण्य बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे 2 जून से एक मामले पर काम कर रहे थे और उनका प्रयास था कि अभिषेक बनर्जी को कानूनी राहत मिल सके। उनका दावा है कि बाद में उन्हें जानकारी दी गई कि मामले की पैरवी के लिए किसी अन्य वकील को जिम्मेदारी दी जा रही है, जो उनके पिता कल्याण बनर्जी से जूनियर हैं। शीर्षाण्य के अनुसार, वकालत के पेशे में वरिष्ठता और पेशेवर शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है और इसी सिद्धांत के आधार पर उन्होंने मामले से अलग होने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि वकीलों का भी आत्मसम्मान होता है और पेशेवर सम्मान हर व्यक्ति का अधिकार है। उनका दावा है कि यदि किसी पेशेवर को उचित सम्मान नहीं दिया जाता है तो उसके लिए ऐसे मामलों में काम जारी रखना मुश्किल हो जाता है। शीर्षाण्य ने यह भी कहा कि उन्होंने जो निर्णय लिया है, वह पूरी तरह पेशेवर आधार पर लिया गया है और इसका उद्देश्य अपने पेशे की गरिमा बनाए रखना है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह फैसला पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के प्रति उनके रुख को प्रभावित नहीं करता। शीर्षाण्य ने कहा कि वे ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी के लिए पहले की तरह काम करते रहेंगे। उनका कहना था कि टीएमसी केवल किसी एक नेता का नाम नहीं है, बल्कि बूथ स्तर पर काम करने वाले हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं का सामूहिक संगठन है।
इस बीच, वरिष्ठ टीएमसी नेता Kalyan Banerjee ने भी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी आपत्तियां रखते हुए अभिषेक बनर्जी पर अहंकारी व्यवहार का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वे अभिषेक से जुड़े कानूनी मामलों में आगे काम नहीं करेंगे। हालांकि, इन बयानों पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर विभिन्न स्तरों पर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कई नेता संगठनात्मक फैसलों और नेतृत्व शैली को लेकर अपनी राय सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर रहे हैं। ऐसे में कल्याण बनर्जी और शीर्षाण्य बनर्जी की टिप्पणियां पार्टी के अंदर चल रही बहस को और तेज कर सकती हैं।
फिलहाल यह पूरा विवाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर अभिषेक बनर्जी पार्टी संगठन में अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी पार्टी के लिए नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को किस तरह संभालता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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