
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी सियासी हलचल के बीच एक नया नाम चर्चा के केंद्र में आ गया है। पार्टी के भीतर कथित बगावत (Rebellion) और सांसदों (Members of Parliament) के संभावित दल-बदल प्रकरण में आंध्र प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के सांसद सीएम रमेश (C.M. Ramesh) की भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, भले ही इस पूरे अभियान का नेतृत्व पश्चिम बंगाल में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी तथा केंद्रीय नेतृत्व के कुछ प्रमुख चेहरे कर रहे हों, लेकिन टीएमसी सांसदों से व्यक्तिगत संपर्क साधने और उन्हें भाजपा के पक्ष में करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से सीएम रमेश निभा रहे हैं।
बताया जाता है कि कारोबारी से राजनेता बने सीएम रमेश के कई टीएमसी सांसदों से वर्षों पुराने व्यक्तिगत संबंध हैं। संसद परिसर और विभिन्न राजनीतिक आयोजनों के दौरान बने इन संपर्कों का इस्तेमाल अब राजनीतिक समीकरण बदलने के लिए किया जा रहा है।
खुद सीएम रमेश ने भी सांसदों को मनाने की अपनी क्षमता का जिक्र करते हुए कहा है कि लोगों को सहमत कराना उनकी विशेषता है और वे कम समय में किसी को भी अपनी बात समझा सकते हैं। उनका दावा है कि अधिकांश टीएमसी सांसदों से उनके लंबे समय से व्यक्तिगत संबंध हैं।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कथित तौर पर 22 सांसदों—जिनमें 19 लोकसभा और 3 राज्यसभा सदस्य बताए जा रहे हैं—को भाजपा में आने के लिए दो प्रमुख आश्वासन दिए गए हैं। पहला, उनके संसदीय क्षेत्रों के विकास में केंद्र सरकार का सहयोग मिलेगा। दूसरा, केंद्रीय और स्थानीय जांच एजेंसियों से जुड़ी परेशानियों में राहत का भरोसा दिया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सीएम रमेश ने किसी भी तरह के आर्थिक प्रलोभन या पद के ऑफर की बात को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक विचार और संबंधों पर आधारित है, इसमें किसी प्रकार का वित्तीय लेन-देन शामिल नहीं है।
इस बीच टीएमसी की वरिष्ठ नेता और सांसद Mahua Moitra ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने माना कि सीएम रमेश राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने और नेटवर्किंग के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके अनुसार उन्हें इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य सूत्रधार बताना अतिशयोक्ति होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम रमेश पहले भी इसी तरह के राजनीतिक अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं। वर्ष 2019 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के कई सांसदों के भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया में भी उनका नाम सामने आया था।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी सांसद Nishikant Dubey का नाम भी चर्चा में है। वहीं, कई टीएमसी सांसदों ने अंतिम फैसला लेने से पहले शुभेंदु अधिकारी से व्यक्तिगत मुलाकात की इच्छा जताई थी। बताया जाता है कि ऐसी एक महत्वपूर्ण बैठक 8 जून को आयोजित डिनर कार्यक्रम के दौरान हुई थी।
हालांकि, टीएमसी और बीजेपी दोनों की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में बंगाल की राजनीति में जारी इस कथित ऑपरेशन और उसके वास्तविक असर को लेकर सियासी अटकलों का दौर जारी है।
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