
इंदौर। भारत सरकार के निर्देशों और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के बावजूद दिव्यांगों को मनोरंजन का अधिकार मिल ही नहीं पाया, पर अब फिल्म सिर्फ देखी नहीं, महसूस भी की जा सकेगी। निर्देशों के मुताबिक सिनेमाघरों में ऑडियो डिस्क्रिप्शन (श्रव्य वर्णन), क्लोज्ड कैप्शनिंग (हर आवाज और आहट को लिखकर बताना), ओपन कैप्शनिंग (बोले जा रहे शब्द और वार्तालाप लिखना) भारतीय सांकेतिक भाषा जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। इससे दृष्टिबाधित दर्शक फिल्म के दृश्य सुनकर समझ सकेंगे, जबकि श्रवणबाधित दर्शक संवाद पढक़र और सांकेतिक भाषा की मदद से कहानी से जुड़ सकेंगे।
अंधेरे हॉल में फिल्म चलती रही, पर्दे पर कहानी बदलती रही, लेकिन हजारों दृष्टिबाधित और श्रवणबाधित दर्शकों के लिए वह सिर्फ आवाज और अधूरे संकेतों का खेल बनकर रह जाती थी। देशभक्ति, मनोरंजन, सामाजिक संदेश देने वाली कई बड़ी फिल्में लगकर उतर गईं, लेकिन वर्षों से मनोरंजन के अधिकार से वंचित दिव्यांगजनों की इस पीड़ा को आखिरकार सरकार ने गंभीरता से लिया है।
अब प्रदेश के सभी मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों को दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाना होगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर कहा है कि सिनेमाघरों में दिव्यांग दर्शकों के लिए आवश्यक सुविधाएं तत्काल सुनिश्चित की जाएं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग मध्यप्रदेश शासन के अपर सचिव कैलाश वानखेड़े ने सभी जिलों के कलेक्टरों को लिखित में आदेश जारी किए हैं। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग द्वारा इंदौर में भी सभी सिनेमाघरों की सूची तैयार कर ली गई है और उन्हें मौखिक तौर पर जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। ज्ञात हो कि इंदौर के 16 सिंगल व मल्टीस्क्रीन सिनेमाघर में 68 स्क्रीन संचालित हो रही हैं।
टिकट लेने से लेकर फिल्म खत्म होने तक मिलेगी मदद
सिर्फ तकनीकी सुविधाएं ही नहीं, बल्कि टिकट काउंटर और ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भी इन सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी देनी होगी। जरूरत पडऩे पर स्मार्ट ग्लास, हेडफोन, मोबाइल ऐप और अन्य तकनीकी साधनों के साथ शारीरिक सहायता भी उपलब्ध करानी होगी। फिलहाल सिनेमाघरों में दिखावे के लिए व्हीलचेयर रखी होती है, लेकिन हॉल तक पहुंचने के लिए दिव्यांगों को घिसटना ही पड़ रहा है। ज्ञात हो कि प्रदेश में वर्षों से सैकड़ों सिनेमाघर संचालित हो रहे हैं, लेकिन दिव्यांगजनों के लिए बुनियादी सुविधाएं अब तक नहीं हैं। मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों में समान भागीदारी का अधिकार कानून में पहले से है, फिर भी किसी विशेष फिल्म की स्क्रीनिंग रखकर अधिकारी और नेता अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेते हैं।
कलेक्टर करेंगे जांच, लापरवाही पर होगी जवाबदेही
हाल ही में सीएम हेल्पलाइन पर इंदौर के एक दिव्यांग ने लिखित शिकायत कर व्हीलचेयर नहीं मिलने और मॉल में घिसटकर चलने को मजबूर होने की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने जिलावार सिनेमाघरों का सर्वे कराने और वहां उपलब्ध सुविधाओं का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टरों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि दिव्यांग दर्शकों से जुड़ी शिकायतों का रिकॉर्ड रखा जाए और उनका समय पर निराकरण हो।
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