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खाली शराब की बोतल लौटाओ, तुरंत पाओ ₹10; चेन्नई में AI मशीन बनी सफाई और रीसाइक्लिंग की नई मिसाल

June 17, 2026

चेन्नई। शराब की खाली बोतलों (Empty wine bottles) से फैलने वाले कचरे और पर्यावरणीय नुकसान से निपटने के लिए तमिलनाडु ने तकनीक का सहारा लिया है। राजधानी चेन्नई (Chennai) के एग्मोर क्षेत्र में स्थित एक सरकारी शराब दुकान (Tasmak) पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ऑटोमैटिक बोतल कलेक्शन मशीन स्थापित की गई है। इस मशीन में खाली बोतल जमा करने पर उपभोक्ताओं को तुरंत 10 रुपये का रिफंड मिल रहा है।

‘रिवर्स वेंडिंग मशीन’ नामक यह प्रणाली बोतलों की पहचान और सत्यापन के लिए आधुनिक कैमरों और सेंसरों का उपयोग करती है। जैसे ही कोई व्यक्ति खाली कांच की बोतल मशीन में डालता है, यह उसके आकार, ब्रांड, गुणवत्ता और स्थिति की जांच करती है। बोतल मानकों के अनुरूप पाए जाने पर मशीन तत्काल 10 रुपये वापस कर देती है। भविष्य में इस सिस्टम को डिजिटल भुगतान सुविधाओं से भी जोड़े जाने की योजना है।

दरअसल, तमिलनाडु के पर्यटन और पहाड़ी इलाकों में शराब की खाली बोतलें बड़ी पर्यावरणीय समस्या बन गई थीं। जंगलों, सड़कों और घाटी क्षेत्रों में फेंके गए टूटे कांच से वन्यजीवों को नुकसान पहुंच रहा था। इसी समस्या को देखते हुए नीलगिरी और कोडाइकनाल जैसे क्षेत्रों में सबसे पहले बोतल वापसी योजना शुरू की गई थी।

इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को खाली बोतलों के संग्रह और रीसाइक्लिंग के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शराब की प्रत्येक बोतल पर 10 रुपये अतिरिक्त जमा राशि लेने और बोतल वापस करने पर वही राशि लौटाने की व्यवस्था लागू की गई।


  • वर्ष 2022 में शुरू हुई इस योजना की निगरानी स्वयं हाई कोर्ट कर रहा है। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि उपभोक्ताओं को उनका रिफंड समय पर मिले और योजना केवल कागजों तक सीमित न रहे।

    योजना की सफलता को देखते हुए अब इसे पूरे तमिलनाडु में विस्तार देने की तैयारी है। अदालत ने भी राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि बोतल वापसी और रीसाइक्लिंग मॉडल को केवल चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित न रखा जाए।

    दुनिया के कई देशों में ऐसी व्यवस्था पहले से सफलतापूर्वक लागू है। जर्मनी की प्रसिद्ध ‘Pfand’ प्रणाली के तहत बोतल खरीदते समय अतिरिक्त राशि ली जाती है और वापसी पर लौटाई जाती है। इस मॉडल की बदौलत वहां 90 से 95 प्रतिशत तक बोतलें दोबारा रीसाइक्लिंग प्रक्रिया में शामिल हो जाती हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खाली बोतलों को कचरा मानने के बजाय संसाधन के रूप में उपयोग करने की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रीसाइक्लिंग उद्योग को भी मजबूती देगी। अच्छी स्थिति वाली बोतलों का दोबारा उपयोग किया जाएगा, जबकि क्षतिग्रस्त कांच को पिघलाकर नई बोतलें, दवा की शीशियां, जार और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे।

    तमिलनाडु में पहले से मौजूद मजबूत कांच निर्माण और रीसाइक्लिंग उद्योग इस परियोजना को और प्रभावी बना सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ इसे स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

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