
- जनसुनवाई के दौरान एसपी आफिस परिसर में दो महिलाओं की मारपीट का मामला
जबलपुर। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान दो महिलाओं के बीच जमकर मारपीट हुई एक दूसरे के बाल खींचकर, जमीन पर पटककर मारपीट की गई। इसी बीच एक महिला को गाल में चोट लगने के कारण काफी खून निकलने लगा। यह पूरी घटना एक सरदार नाम के व्यक्ति को लेकर हुआ है। घायल महिला चीख-चीखकर बता रही थी कि एक सरदार है उसी के कहने पर आरोपी महिला ने उस पर हमला किया है।
जानकारी के अनुसार रांझी क्षेत्र निवासी पिंकी टंडन का अपने पति से विवाद चल रहा है। इसी मामले में वह जनसुनवाई में शिकायत देने एसपी ऑफिस पहुंची थी। शिकायत देकर जैसे ही वह कार्यालय से बाहर निकली, वहां खुद को पत्रकार बताने वाली यूट्यूबर विद्या रैकवार से उसका सामना हो गया। दोनों के बीच पुरानी बातों को लेकर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते मामला मारपीट में बदल गया। पिंकी टंडन का आरोप है कि विद्या रैकवार ने उसके पति के पक्ष में एकतरफा खबर बनाई थी, जबकि उसकी बात सुनी ही नहीं गई। पिंकी का कहना है कि इस खबर से उसे बदनाम करने की कोशिश की गई। इसी बात को लेकर दोनों महिलाओं में पहले भी कहासुनी हो चुकी थी। मंगलवार को आमना-सामना होते ही विवाद फिर भड़क गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों महिलाओं के बीच जमकर लात-घूंसे चले। परिसर में मौजूद लोग कुछ देर तक समझ ही नहीं पाए कि आखिर मामला क्या है। जब विवाद बढ़ता गया तो लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया। इसी दौरान एक महिला के चेहरे पर चोट आ गई और खून निकलने लगा। घटना के बाद एसपी ऑफिस में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हंगामे के बीच घायल महिला लगातार यह कहती रही कि यह सब एक सरदार के कहने पर किया जा रहा है। महिला के इस आरोप के बाद कार्यालय परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि पुलिस की ओर से इस आरोप की अभी कोई पुष्टि नहीं की गई है। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस का महिला स्टाफ मौके पर पहुंचा। पुलिस ने दोनों महिलाओं को अलग कराया और थाने बुलाकर लिखित शिकायत ली। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
यूट्यूबर और फर्जी पत्रकारों पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर खुद को पत्रकार बताने वाले यूट्यूबरों और गैर-पंजीकृत मीडिया संस्थानों से जुड़े लोगों की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। शहर में लंबे समय से शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ में थानों, सरकारी कार्यालयों और जनसुनवाई जैसे संवेदनशील स्थानों पर पहुंचकर माहौल प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में एकतरफा वीडियो, भ्रामक खबरें और दबाव बनाने वाली गतिविधियों के आरोप भी सामने आते रहे हैं। प्रशासनिक अमले के लिए ऐसे लोग कई बार परेशानी का कारण बनते हैं, क्योंकि इनकी वजह से न केवल जांच प्रभावित होती है, बल्कि आम लोगों तक गलत जानकारी भी पहुंचती है।