
जबलपुर। महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के वैश्विक मानचित्र पर संस्कारधानी जबलपुर ने एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। दुनिया के चुनिंदा 65 महानगरों में संचालित होने वाले संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित सेफ सिटीज एंड सेफ पब्लिक स्पेस फॉर वूमेन प्रोजेक्ट के लिए भारत से एकमात्र शहर के रूप में जबलपुर का चयन हुआ है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू की अगुवाई में यूएन वूमेन और नगर निगम के तत्वावधान में इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए मानस भवन के लघु कक्ष सभागार में एक उच्च स्तरीय और बेहद सकारात्मक कार्यशाला संपन्न हुई।
बैठक में महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, नगर निगम अध्यक्ष रिंकुज विज, एमआईसी डॉं. सुभाष तिवारी, विवेकराम सोनकर, अंशुल राघवेन्द्र यादव और महिला पार्षदों ने यूएन वूमेन की टीम के साथ मिलकर शहर की माताओं, बहनों और बेटियों के लिए एक सुरक्षित और सुदृढ़ वातावरण तैयार करने का रोडमैप तैयार किया। इस अवसर पर सभी महिला पार्षदों ने महिला सुरक्षा को लेकर अपने-अपने अतिमूल्यवान सुझाव दिये।
वैश्विक मंच पर जबलपुर का डंका
यह पूरे मध्य प्रदेश और देश के लिए गौरव की बात है कि महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक स्थल विकसित करने के इस वैश्विक अभियान में भारत की ओर से केवल जबलपुर को चुना गया है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और निगमाध्यक्ष रिंकुज विज ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना शहर की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली साबित होगी।
महिला पार्षदों के सुझावों से बनेगा सुरक्षा कवच
शहर के चप्पे-चप्पे की समझ रखने वाली महिला पार्षदों ने सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए व्यावहारिक और बेहद प्रभावी सुझाव साझा किए, जिन्हें प्रोजेक्ट में शामिल किया जा रहा है। शहर के जिन सुनसान इलाकों में अंधेरा रहता है, वहां युद्ध स्तर पर आधुनिक प्रकाश व्यवस्था की जाएगी ताकि सुरक्षा का अहसास मजबूत हो। नशे की गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए चिन्हित स्थानों पर पुलिस की नियमित और सघन गश्ती पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाएगी। कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षित और आत्मविश्वास से लबरेज बनाने के लिए बड़े पैमाने पर आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जाएगी। शहर की सभी बसों, टैक्सियों और ऑटो में अनिवार्य रूप से जीपीएस सिस्टम इंस्टॉल किया जाएगा, जिससे उनकी पल-पल की लोकेशन ट्रैक हो सकेगी और महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित सफर कर सकेंगी। बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स के लिए भी विशेष काउंसिलिंग सत्र आयोजित होंगे, ताकि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति सजगता की शुरुआत घर से हो सके।
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