
जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के शल्य चिकित्सा विभाग ने स्तन कैंसर उपचार और अनुसंधान के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश की प्रतिष्ठित संस्था भारतीय स्तन शल्य चिकित्सक संघ के वार्षिक सम्मेलन एबीएसआईकॉन-2026 (मदुरै) में मेडिकल कॉलेज के शल्य चिकित्सा विभाग के द्वितीय वर्ष के दो रेजिडेंट चिकित्सकों के शोधपत्र देश के शीर्ष-5 सम्मानित शोधपत्रों में शामिल हुए। इनमें डॉ. डैफ्नी जॉन को तीसरा और डॉ. प्रीति सबनानी को चौथा स्थान प्राप्त हुआ।
50 हजार की तकनीक, 100 रुपये से भी कम खर्च में विकसित
डॉ. डैफ्नी जॉन ने सम्मेलन में लक्षित कांख ग्रंथि विच्छेदन और प्रहरी लसीका ग्रंथि बायोप्सी की कम लागत वाली तकनीक प्रस्तुत की। विभाग के अनुसार जिस प्रक्रिया पर निजी अस्पतालों में 50 हजार रुपये से अधिक खर्च आता है, उसे मेडिकल कॉलेज की टीम ने 100 रुपये से भी कम लागत में करने की तकनीक विकसित की है। यह शोध सीमित संसाधनों में मरीजों को सुलभ और किफायती उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्तन कैंसर परामर्श के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संवाद प्रणाली
डॉ. प्रीति सबनानी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्तन स्वास्थ्य परामर्श संवाद प्रणाली पर अपना शोध प्रस्तुत किया। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्तन कैंसर से जुड़ी शुरुआती जानकारी, जागरूकता और परामर्श डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराना है। इस नवाचार की विशेषज्ञों ने सराहना की।
राष्ट्रीय संस्था की कार्यकारिणी में भी मिली जिम्मेदारी
सम्मेलन के दौरान डॉ. संजय यादव को भारतीय स्तन शल्य चिकित्सक संघ की कार्यकारिणी समिति का सदस्य चुना गया। उन्होंने सम्मेलन में दो आमंत्रित व्याख्यान भी दिए, जिसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
सामूहिक प्रयास का मिला राष्ट्रीय सम्मान
डॉ. यादव ने इस उपलब्धि का श्रेय मेडिकल कॉलेज के डीन, अधीक्षक, शल्य चिकित्सा विभाग के प्राध्यापकों तथा रेडियोथेरेपी, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग की पूरी टीम को दिया। उनका कहना है कि जबलपुर में अब उन्नत, किफायती और नवाचार आधारित स्तन कैंसर उपचार को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
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