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21 जून को तीन स्वदेशी युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल करेंगे प्रधानमंत्री मोदी

June 19, 2026


नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) तीन स्वदेशी युद्धपोत (Three indigenous Warships) 21 जून को भारतीय नौसेना में शामिल करेंगे (Will induct into Indian Navy on June 21) ।


  • भारतीय नौसेना नीले समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए लगातार स्वदेशी युद्धपोतों को बेड़े में शामिल कर रही है। एक के बाद एक आधुनिक वॉरशिप नौसेना को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में 30 मार्च का दिन ऐतिहासिक बन गया था, जब एक ही दिन में नौसेना को तीन स्वदेशी जहाज सौंपे गए थे। 21 जून का दिन भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिन ही में तीन वॉरशिप को नेवी में शामिल करेंगे। कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट में आयोजित एक खास समारोह में इन तीनों वॉरशिप को नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। इनमें एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी, दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रेह और तीसरा सर्वे वेसेल लार्ज “संशोधक” है।

    हालांकि, यह पहला मौक़ा नहीं है जब एक ही दिन में तीन वॉरशिप नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। इससे पहले 15 जनवरी 2025 को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नीलगिरी क्लास का पहला स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी, डिस्ट्रॉयर आईएनएस सूरत और पनडुब्बी आईएनएस वागशीर भारतीय नौसेना में शामिल किए गए थे। इसी साल 30 मार्च को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित पांचवां गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी भारतीय नौसेना को सौंपा था। दूनागिरी, पूर्ववर्ती आईएनएस दूनागिरी का आधुनिक स्वरूप है, जो लींडर क्लास का फ्रिगेट था और 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक नौसेना का हिस्सा रहा। यह 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा गया पी17ए श्रेणी का पांचवां वॉरशिप है। पहले चार जहाजों के निर्माण से मिले अनुभव के आधार पर इसका निर्माण समय 93 महीनों से घटाकर 80 महीने कर दिया गया।

    प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से पहला आईएनएस नीलगिरी जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल हुआ था। इसके बाद हिमगिरी और उदयगिरी को शामिल किया गया। मार्च 2026 में तारागिरी नौसेना में शामिल किया गया था अब दूनागिरी की बारी है। इन सभी फ्रिगेट्स में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली लगी है, जो एंटी-शिप और एंटी-सर्फेस युद्ध में बेहद प्रभावी मानी जाती है। इसके अलावा यह वॉरशिप बराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आधुनिक एयर डिफेंस गन स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम मल्टी-फंक्शन रडार जैसी अत्याधुनिक सिस्टम से लेस हैं। यह फ्रिगेट दुश्मन के हमलों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं और इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। 6,700 टन वजनी यह युद्धपोत 30 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है।

    दुश्मन की सबमरीन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना शुरू की थी। साल 2019 में 16 वॉरशिप के निर्माण का कांट्रेक्ट दिया गया था, जिनमें आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं। इसी परियोजना के तहत निर्मित अग्रेह को भी नौसेना में शामिल किया जा रहा है। इससे पहले आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे और आईएनएस अंजदीप को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इस क्राफ्ट की खासियत है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है। यह जहाज 25 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और तक़रीबन 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है। तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है।

    समुद्र के अंदर की स्थितियों को समझने और हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने के लिए आधुनिक सर्वे जहाजों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इन्हीं सर्वेक्षणों के आधार पर सुरक्षित नेविगेशन के लिए समुद्री चार्ट तैयार किए जाते हैं। भारतीय नौसेना ने 30 अक्टूबर 2018 को चार बड़े सर्वे जहाजों के निर्माण का कांट्रेक्ट दिया था। इस कड़ी में आईएनएस संध्याक और आईएनएस निर्देशक साल 2024 में नौसेना में शामिल किए गए थे, जबकि आईएनएस इक्षक को 2025 में बेड़े का हिस्सा बनाया गया। अब चौथा और आखिरी लार्ज सर्वे वेसेल संशोधक नौसेना में शामिल होने जा रहा है। समुद्र की सतह भले ही शांत दिखाई दे, लेकिन उसके नीचे कई तरह के खतरे मौजूद होते हैं। कहीं समुद्र की गहराई अचानक बढ़ जाती है तो कहीं कम हो जाती है। सुनामी और अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण समुद्र तल में लगातार बदलाव होता रहता है। ऐसे अनदेखे खतरों से सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करने के लिए सटीक हाइड्रोग्राफिक चार्ट जरूरी होते हैं, जिन्हें ऐसे सर्वे वेसेल तैयार करते हैं।

    संशोधक की खासियत है कि यह समुद्र तल की स्कैनिंग करना, सुरक्षित नेविगेशन रूट के लिए समुद्री चार्ट तैयार करने के साथ-साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वे करना है। जीआरएसई, कोलकाता में निर्मित इस जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के नेवल डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। 110 मीटर लंबा और लगभग 3,800 टन वजनी यह जहाज दो डीजल इंजनों से संचालित होता है। यह 25 दिनों से ज्यादा समय तक समुद्र में रहने में सक्षम है और इसकी अधिकतम रफ़्तार 18 नॉट है। भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद संशोधक देश की समुद्री सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र के मैप और सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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