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VIDEO हटाएं… जजों के लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट की फेक न्यूज पर HC सख्त

June 19, 2026

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा, जिसमें लंदन में जजों और मंत्रियों के बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की एक फर्जी वायरल रिपोर्ट का जिक्र था. हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस दावे से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को सब्सक्राइबर की जानकारी देनी होगी और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को कानून के मुताबिक जांच करने का निर्देश दिया.

बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दलील दी कि सफाई देने के बावजूद यह फर्जी रिपोर्ट ऑनलाइन फैल रही है, जिससे न्यायपालिका और खेल, दोनों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है. बैडमिंटन एसोसिएशन की ओर से सीनियर एडवोकेट अपूर्व कुरुप ने कहा कि लंदन में जजों के बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की वायरल फेक न्यूज तेजी से फैल रही है और इससे खेल की बदनामी भी हो रही है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि उन्हें पहले ही इसकी कॉपी मिल गई थी और यह फेक न्यूज तेजी से फैल रही है. जस्टिस तेजस करिया ने वकीलों से कहा कि वे याचिकाओं पर आपत्तियों को दूर करें. मामले को आज ही लिस्ट किया जाएगा. सीनियर एडवोकेट अपूर्व कुरुप ने कई ऐसी पोस्ट और वीडियो की ओर इशारा किया जिनमें दावा किया गया है कि जज और मंत्री उस इवेंट में मौजूद थे.


  • उन्होंने कहा कि इस खेल को एक बुरी गतिविधि के तौर पर पेश किया जा रहा है. यह न्यायपालिका का अपमान है, जो एक नागरिक के तौर पर बहुत चिंता की बात है. साथ ही यह खेल का भी अपमान है, जिससे उसका मजाक बन रहा है. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने फैक्ट चेक किया है. यह पूरी तरह से झूठा और गुमराह करने वाला है. सोशल मीडिया पर शेयर तस्वीरें, जिनमें CJI सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और किरेन रिजिजू दिख रहे हैं, वे 2025 की हैं.

    एसजी ने कहा, उन्होंने लंदन में किसी बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया. सीजेआई यूके में थे, उन्होंने यूके के चीफ जस्टिस से मुलाकात की और कुछ इवेंट्स में हिस्सा लिया. मंत्री इस दौरान लंदन नहीं गए थे और यह आरोप भी झूठा है कि वहां 75 जज मौजूद थे. इसकी जांच होनी चाहिए और इसे शुरू करने वाले का पता लगाया जाना चाहिए. कोर्ट नोटिस जारी कर जांच का आदेश दे सकता है.

    वहीं वकील कुरुप ने कहा कि कुछ गाइडलाइंस होनी चाहिए क्योंकि भविष्य में ऐसा फिर से हो सकता है. इस पर एसजी ने कहा कि हर जगह यह बात फैलाई जा रही है कि सरकार 75 जजों को लंदन मजा करने के लिए ले गई थी. आम आदमी लिखी हुई बातों पर विश्वास कर लेता है. सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि हम आदेश जारी करेंगे.

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