
नई दिल्ली । महाराष्ट्र से एक ऐसी दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है, जिसने डॉक्टरों की मेहनत (The hard work of doctors) और त्वरित इलाज (Immediate treatment) की अहमियत को एक बार फिर साबित कर दिया है। मुंबई स्थित बीएमसी (Mumbai-based BMC) द्वारा संचालित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अस्पताल (Bhimrao Ambedkar Hospital) में चार महीने की एक नवजात बच्ची को कार्डियक अरेस्ट(Cardiac arrest) के बाद समय रहते बचा लिया गया।
जानकारी के अनुसार बच्ची को गंभीर हालत में दूसरे अस्पताल से रेफर कर लाया गया था। जब उसे इमरजेंसी में लाया गया, उस समय उसकी धड़कन लगभग बंद थी और हालत बेहद नाजुक थी। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए तुरंत CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन शुरू किया।
बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रंजन के अनुसार, बच्ची की स्थिति बेहद गंभीर थी और उसके शरीर में एसिड-बेस बैलेंस बिगड़ चुका था। जैसे ही टीम ने CPR शुरू किया, कुछ ही मिनटों में प्रतिक्रिया मिलनी शुरू हो गई। लगातार तीन से चार मिनट के प्रयास के बाद बच्ची की धड़कन वापस आ गई, जिससे मेडिकल टीम को राहत मिली।
इलाज के दौरान बच्ची को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और आवश्यक दवाएं दी गईं। डॉक्टरों ने बताया कि यह पूरा मामला “गोल्डन ऑवर” के भीतर किया गया हस्तक्षेप था, जिसकी वजह से बच्ची की जान बच सकी। अगर थोड़ी भी देरी होती तो मस्तिष्क को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था या स्थिति जानलेवा हो सकती थी।
परिजनों के अनुसार, बच्ची पिछले कुछ दिनों से बुखार और दस्त से पीड़ित थी। धीरे-धीरे उसकी हालत बिगड़ती गई और उसे सांस लेने में कठिनाई होने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उसे पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया।
फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की निगरानी में उसमें सुधार जारी है। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल टीम का आभार जताया, जिन्होंने समय रहते सही इलाज देकर मासूम की जान बचाई।
यह मामला न केवल चिकित्सा विज्ञान की सफलता को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि आपात स्थिति में त्वरित निर्णय कितने महत्वपूर्ण होते हैं।
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