नई दिल्ली। केरल के कासरगोड जिले से इंसानियत और सामाजिक सौहार्द (Humanity and Social Harmony) की एक भावुक मिसाल सामने आई है। यहां एक मुस्लिम महिला (Muslim woman) जनप्रतिनिधि ने परिवार द्वारा ठुकराए गए एक हिंदू बुजुर्ग का पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों (Religious customs and rituals) के साथ अंतिम संस्कार कराया। उनके इस मानवीय कदम की सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना हो रही है।
64 वर्षीय नारायणन, जो मंजेश्वरम के चिगरुपदावु क्षेत्र के निवासी थे, कैंसर की अंतिम अवस्था से जूझ रहे थे। पिछले करीब एक महीने से उनका इलाज कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था, जहां गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
कासरगोड पंचायत की विकास मामलों की स्थायी समिति की अध्यक्ष इरफाना इकबाल ने बताया कि लगभग एक माह पहले नारायणन एक दुकान के बरामदे में बेहद कमजोर और भूखे हालात में मिले थे। वार्ड सदस्य से सूचना मिलने के बाद उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद स्थानीय धर्मार्थ संस्था के स्वयंसेवकों की मदद से उन्हें प्राथमिक उपचार दिलाकर अस्पताल पहुंचाया गया।
शुरुआत में उन्हें ट्रस्ट द्वारा संचालित वृद्धाश्रम भेजने की योजना थी, लेकिन जांच में पता चला कि उन्हें चौथे चरण का कैंसर है। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान नारायणन का निधन हो गया। इसके बाद पुलिस ने उनके परिजनों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने इरफाना इकबाल को अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाने की अनुमति दे दी।
इरफाना इकबाल ने उप्पाला स्थित हिंदू श्मशान घाट में नारायणन का अंतिम संस्कार पूरी धार्मिक परंपरा के अनुसार संपन्न कराया। बुर्का पहनकर अंतिम संस्कार की सभी आवश्यक रस्में निभाती उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
इस घटना के बाद इरफाना इकबाल ने फेसबुक पर भावुक संदेश साझा करते हुए लिखा कि नारायणन के अंतिम समय में कोई करीबी रिश्तेदार साथ नहीं था, इसलिए उन्होंने एक बेटी की तरह उनका अंतिम संस्कार किया। उन्होंने लिखा कि “मानवता किसी भी धर्म और राजनीति से ऊपर होती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि आगे भी वह ऐसे बेसहारा और असहाय बुजुर्गों की मदद करती रहेंगी। उनके अनुसार, जिस धर्मार्थ संस्था से वह जुड़ी हैं, वहां रहने वाले लोगों का अंतिम संस्कार हमेशा उनके-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया जाता है और उनके समुदाय ने भी इस कार्य पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
कासरगोड से कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने भी इरफाना इकबाल के इस कदम की खुले दिल से प्रशंसा की। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्हें “जनसेवा के नए दौर का प्रतीक और उम्मीद की किरण” बताते हुए लिखा कि नफरत के माहौल में उनका यह कार्य प्रेम, करुणा और मानवीय मूल्यों का प्रेरणादायक उदाहरण है।
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