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मौत की सजा, पार्टी पर रोक…शेख हसीना के लिए आसान नहीं वतन लौटना

June 29, 2026

नई दिल्ली। बांग्लादेश (Bangladesh) की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने पहली बार साफ तौर पर कहा है कि वह इसी साल अपने देश लौटेंगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्हें 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। भारत में रह रहीं हसीना ने एक मीडिया समूह को दिए साक्षात्कार में कहा कि वह हर बाधा और हर साजिश को पार करते हुए बांग्लादेश लौटेंगी।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बांग्लादेश में वापसी करना शेख हसीना के लिए आसान होगा? हसीना पर क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं? अपनी वापसी को लेकर हसीना का क्या कहना है? वापसी की खबरों के बीच बांग्लादेश सरकार क्या कर रही है? शेख हसीना अपने पार्टी से कैसे संपर्क में हैं? बांग्लादेश में पार्टी की मौजूदा स्थिति क्या है? पहले कब-कब इसी तरह के संकट से जूझ चुकीं शेख हसीना?

हसीना पर क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं?
पिछले साल नवंबर में ढाका की एक अदालत ने शेख हसीना को 2024 के आंदोलन के दौरान लोगों की हत्या के लिए उकसाने, हत्याओं के आदेश देने और अत्याचार रोकने में विफल रहने का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की फरवरी में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, शेख हसीना सरकार के खिलाफ चले तीन सप्ताह के विरोध प्रदर्शनों के दौरान 1,400 तक लोगों की मौत हुई। इसी घटनाक्रम के बाद शेख हसीना और उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं पर हत्या समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए, जिनके आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

हसीना ने इस फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनका आरोप है कि बांग्लादेश की न्यायपालिका का इस्तेमाल उनकी पार्टी आवामी लीग के नेताओं को राजनीति से खत्म करने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि वह मौत से नहीं डरतीं और पहले भी उनकी पार्टी को खत्म करने की कोशिशें नाकाम रही हैं, इस बार भी होंगी।


  • अपनी वापसी को लेकर हसीना का क्या कहना है?
    एक रिपोर्ट के अनुसार, हसीना का कहना है कि उनकी वापसी सिर्फ सत्ता में लौटने के लिए नहीं है। उनके मुताबिक उनका उद्देश्य बांग्लादेश में लोकतंत्र, कानून का राज, लोगों के राजनीतिक अधिकार और 1971 के मुक्ति संग्राम की भावना को फिर से स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि आवामी लीग पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद पार्टी खत्म नहीं हुई है। उनके अनुसार आवामी लीग कोई कागजी संगठन नहीं, बल्कि बंगाल की मिट्टी, इतिहास, लोगों और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी राजनीतिक ताकत है। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार से मांग की कि पार्टी पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए, नेताओं पर दर्ज कथित झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं, राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दी जाए। वहीं सरकार का कहना है कि यह पूरी कानूनी प्रक्रिया कथित अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने का हिस्सा है।

    हसीना की वापसी की खबरों के बीच बांग्लादेश में क्या माहौल है?
    आवामी लीग के स्थापना दिवस से पहले बांग्लादेश सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। सरकार ने 22 जून को ढाका समेत पांच अन्य जिलों में 30 जून तक सेना तैनात करने का आदेश दिया था। यह फैसला उस समय लिया गया जब सिर्फ एक सप्ताह पहले ही सेना को देशभर में चल रही लगभग दो साल की ड्यूटी से हटाया गया था। सरकार का कहना था कि उन्हें आशंका है कि आवामी लीग के समर्थक प्रतिबंध के बावजूद रैलियां और प्रदर्शन करने की कोशिश कर सकते हैं। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा था कि खुफिया जानकारी के आधार पर सेना तैनात की गई है ताकि किसी भी तरह की तोड़फोड़ रोकी जा सके और कानून-व्यवस्था बनी रहे।

    हालांकि अवामी लीग ने अपने 77वें स्थापना दिवस पर शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की, जिसके बाद देश के कई हिस्सों में तनाव की स्थिति बन गई। ढाका पुलिस ने बताया था कि केवल राजधानी से ही 26 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, जबकि देश के अन्य हिस्सों से भी कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर भारत में रह रहीं शेख हसीना ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए कहा था कि हम हारने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। पार्टी ने यह भी दावा किया कि वह पहले से 10 गुना अधिक ताकत के साथ वापसी करेगी।


  • शेख हसीना अपने पार्टी से कैसे संपर्क में हैं?
    एक रिपोर्ट के मुताबिक, शेख हसीना फिलहाल दिल्ली के एक सुरक्षित और गुप्त ठिकाने पर रह रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह रोज कई घंटों तक अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करती हैं और लगातार बांग्लादेश में मौजूद नेताओं से संपर्क बनाए हुए हैं। पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री रणनीति बनाने के लिए उनसे मिलने दिल्ली आते हैं। आवामी लीग के छात्र संगठन बांग्लादेश छात्र लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन ने दावा किया कि हसीना एक दिन में 15 से 16 घंटे तक बैठकों और फोन कॉल में व्यस्त रहती हैं और आगामी राजनीतिक संघर्ष की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि पार्टी को विश्वास है कि शेख हसीना एक दिन हीरो की तरह बांग्लादेश लौटेंगी।

    फरवरी में हुए चुनाव को अंतरिम सरकार ने एक दशक से अधिक समय बाद पहला स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव बताया था, लेकिन आवामी लीग का कहना है कि अगर उसे चुनाव लड़ने से रोका जाता है तो चुनाव की लोकतांत्रिक वैधता पर ही सवाल उठता है। पार्टी के पूर्व मंत्री जहांगीर कबीर नानक ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से चुनाव प्रचार और मतदान का बहिष्कार करने व पूरी चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने की अपील की है।

    हालांकि, शेख हसीना और उनकी पार्टी की इस नई राजनीतिक रणनीति को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आवामी लीग अब लोकतंत्र, मानवाधिकार, पारदर्शिता और प्रेस की आजादी की बात कर रही है, लेकिन उसके विरोधियों का कहना है कि सत्ता में रहते हुए पार्टी पर वर्षों तक निरंकुश शासन, भ्रष्टाचार और चुनावों में धांधली के आरोप लगते रहे। इसी वजह से आलोचक आवामी लीग के मौजूदा लोकतंत्र समर्थक रुख को संदेह की नजर से देखते हैं।

    बांग्लादेश में आवामी लीग की स्थिति क्या है?
    जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के बाद 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार गिर गई और उन्हें देश छोड़कर भारत आना पड़ा। इसके बाद बनी मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने 10 मई 2025 को फैसला किया कि जब तक अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में आवामी लीग और उसके नेताओं के खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक पार्टी की सभी राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। अगले ही दिन, 11 मई 2025 को सरकार ने आतंकवाद निरोधक कानून में संशोधन कर इस प्रतिबंध को कानूनी रूप दे दिया। पार्टी की राजनीतिक गतिविधियां निलंबित हो गईं और चुनाव आयोग ने उसका पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) भी रद्द कर दिया है।

    हालांकि इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठे थे। अमेरिका के पांच सांसदों ने मोहम्मद यूनुस को पत्र लिखकर कहा था कि किसी पूरी राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध लगाने से बड़ी संख्या में मतदाता राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के साथ संगठन बनाने की आजादी और व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी को मानवाधिकारों का मूल सिद्धांत बताया। इसके बावजूद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अपने फैसले पर कायम रहा।


  • इसके बाद 12 फरवरी को बांग्लादेश में चुनाव हुए। इसमें चुनी गई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार में भी यह आवामी लीग पर लगा प्रतिबंध जारी रखा गया। संसद ने आतंकवाद निरोधक (संशोधन) अध्यादेश को मंजूरी दी, जिसके तहत आतंकवादी गतिविधियों में शामिल संगठनों पर प्रतिबंध बनाए रखने का प्रावधान कायम रहा। यानी 2026 का चुनाव न लड़ पाने के साथ आवामी लीग पर अब आगे के चुनावों में भी एक दल के तौर पर खड़े होने का संकट बरकरार है।

    शेख हसीना की वापसी के दावे के बीच बांग्लादेश में उनके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है। सोमवार (29 जून) सुबह राजधानी ढाका के धनमंडी मॉडल थाना क्षेत्र में पुलिस ने छापेमारी कर आवामी लीग और उससे जुड़े संगठनों के 10 नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, उन्हें उस समय पकड़ा गया जब वे अचानक एक जुलूस निकालने की तैयारी कर रहे थे। उनके पास से जुबो लीग के मोनोग्राम वाली 15 टोपियां, पार्टी नेताओं की तस्वीरों वाली आठ टी-शर्ट और एक बैनर बरामद किया गया, जिस पर लिखा था, ‘शेख हसीना आएंगी, बांग्लादेश हंसेगा’। पुलिस ने दो बसें और एक निजी कार भी जब्त की है, जिनका इस्तेमाल गिरफ्तार लोग कर रहे थे। सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर दिया गया है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार 18,000 से अधिक पुलिस अधिकारी और सुरक्षाकर्मी राजधानी और संवेदनशील इलाकों में तैनात किए गए हैं।

    पहले कब-कब इसी तरह के संकट से जूझ चुकीं शेख हसीना?
    शेख हसीना को अपने राजनीतिक जीवन में कई बार गंभीर संकटों का सामना करना पड़ा है। पहला बड़ा दौर 15 अगस्त 1975 का था, जब बांग्लादेश के संस्थापक और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान की सैन्य तख्तापलट में हत्या कर दी गई। उस समय शेख हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना विदेश यात्रा पर थीं, जिससे उनकी जान बच गई। इसके बाद दोनों भारत आ गईं और लगभग छह साल तक निर्वासन में रहीं। इसी दौरान 1981 में शेख हसीना को अवामी लीग का अध्यक्ष चुना गया। 17 मई 1981 को वह बांग्लादेश लौटीं और सैन्य शासन के खिलाफ लोकतंत्र बहाली के आंदोलन का नेतृत्व किया। यही उनके राष्ट्रीय राजनीति में उभार की शुरुआत थी और बाद में वह कई बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं।

    इसके बाद 2007 में भी शेख हसीना को बड़े राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ा, हालांकि इस बार उन्हें निर्वासन में नहीं जाना पड़ा। सेना समर्थित अंतरिम सरकार द्वारा आपातकाल लागू किए जाने के बाद जुलाई 2007 में उन्हें भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोपों में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। शेख हसीना ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। जून 2008 में स्वास्थ्य कारणों से उन्हें पैरोल पर रिहा किया गया और इलाज के लिए अमेरिका जाने की अनुमति मिली। इलाज के बाद वह बांग्लादेश लौटीं, अपनी पार्टी का चुनाव अभियान संभाला और दिसंबर 2008 के आम चुनाव में अवामी लीग को भारी जीत दिलाई। इसके बाद 6 जनवरी 2009 को उन्होंने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

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