मुंबई। केतन अग्रवाल हत्याकांड (Ketan Murder Case) की जांच में जुटी पुलिस को अदालत से बड़ी राहत मिली है। पुणे की एक अदालत ने मुख्य आरोपी सिया गोयल (Siya Goyal) और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी (Chetan Chaudhary) की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि मामले के कई अहम पहलुओं की जांच अभी बाकी है, जिनमें घटनास्थल का वैज्ञानिक विश्लेषण, मृतक के लापता पासपोर्ट की बरामदगी और आरोपियों के मूवमेंट का गेट एनालिसिस प्रमुख हैं।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने वारदात से पहले लोहागढ़ किले का कई बार दौरा किया था। पुलिस अब उन स्थानों की सटीक पहचान करना चाहती है, जहां कथित तौर पर हत्या की योजना बनाई गई और घटना का पूर्वाभ्यास किया गया था।
पुलिस के अनुसार, सिया गोयल (20) और चेतन चौधरी (22) पर आरोप है कि उन्होंने साजिश के तहत केतन अग्रवाल को पुणे जिले के लोहागढ़ किले की मुंडेर से धक्का देकर हत्या की।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि 6 जून को मुंबई जाते समय केतन अग्रवाल का पासपोर्ट गायब हो गया था। पुलिस को संदेह है कि रास्ते में इसे फेंका गया हो सकता है। इसी कड़ी में पुलिस सिया की निशानदेही पर उस स्थान की तलाश करना चाहती है, जहां कथित तौर पर पासपोर्ट फेंका गया था।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, खालापुर स्थित एक फूड मॉल के पास सिया ने कैब से कुछ बाहर फेंका था। पुलिस अब उस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करने का प्रयास कर रही है।
पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा गेट एनालिसिस भी है। इसमें किसी व्यक्ति के चलने के तरीके, शारीरिक हावभाव और गतिविधियों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।
अधिकारियों के अनुसार, उनके पास ऐसे सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं जिनमें चेतन चौधरी हुडी पहनकर और चेहरा ढककर लोहागढ़ किले की ओर जाता दिखाई दे रहा है। अब पुलिस उसी तरह की हुडी किसी व्यक्ति को पहनाकर घटनास्थल पर उसकी गतिविधियों का पुनर्निर्माण करेगी और उसकी तुलना सीसीटीवी फुटेज से करेगी, ताकि आरोपी की पहचान और मूवमेंट का तकनीकी सत्यापन किया जा सके।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वारदात से पहले वे कई बार लोहागढ़ किले गए थे और कथित तौर पर घटना को अंजाम देने के स्थान का चयन किया था।
पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि दोनों आरोपी किन-किन स्थानों पर मिलते थे और वहां क्या बातचीत होती थी। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन से डिजिटल डेटा रिकवर करने की प्रक्रिया जारी है। दावा किया गया है कि दोनों ने अपने मोबाइल से कई महत्वपूर्ण जानकारियां और संभावित साक्ष्य हटाने की कोशिश की थी।
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील विपुल डुशिंग ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किलों की गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं और पुलिस की कार्रवाई कानूनी रूप से उचित नहीं है।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने कहा कि जांच अभी निर्णायक चरण में है। कई गवाह सामने आए हैं, जिनका आरोपियों से आमना-सामना कराया जाना है। इसी आधार पर अदालत से हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
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