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दो शिफ्ट में चलेंगे आटो और ई-रिक्शा

July 01, 2026

  • सिंहस्थ से पहले सभी ऑटो ई-रिक्शा पर ‘यूनिक आईडी’ जरूरी-यातायात को सुधारने की कवायद

उज्जैन। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन पुलिस ने शहर की यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। महाकाल मंदिर और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास लगातार लगने वाले जाम को कम करने के लिए अब शहर में संचालित सभी ऑटो और ई-रिक्शा के लिए यूनिक आईडी प्रणाली लागू की गई है। बिना यूनिक आईडी के शहर में ऑटो या ई-रिक्शा का संचालन नहीं किया जा सकेगा।



  • यातायात पुलिस के अनुसार वर्तमान में शहर में करीब 5,000 ऑटो और ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करने और यातायात को संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से सभी ऑटो और ई-रिक्शा का संचालन अब दो शिफ्टों में कराया जाएगा। प्रत्येक वाहन को यूनिक आईडी जारी की जाएगी, जिसके आधार पर उसकी संचालन अवधि निर्धारित होगी। पुलिस ने सभी ऑटो और ई-रिक्शा संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे अगले सात दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से यातायात थाना, उज्जैन पहुंचकर अपनी यूनिक आईडी प्राप्त करें। इसके लिए वाहन के सभी वैध दस्तावेज और चालक का आधार कार्ड साथ लाना आवश्यक होगा। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही संबंधित वाहन को यूनिक आईडी जारी की जाएगी। यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सात दिन की अवधि समाप्त होने के बाद बिना यूनिक आईडी कोई भी ऑटो या ई-रिक्शा शहर में संचालित नहीं किया जा सकेगा। साथ ही यदि कोई चालक अपनी निर्धारित शिफ्ट से अलग समय में वाहन चलाते हुए या बिना यूनिक आईडी के संचालन करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ मोटरयान अधिनियम और प्रचलित यातायात नियमों के तहत चालानी कार्रवाई के साथ अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस का मानना है कि इस व्यवस्था से महाकाल मंदिर, हरसिद्धि मंदिर, रामघाट और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास लगने वाले जाम में कमी आएगी तथा सिंहस्थ-2028 से पहले शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

    ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या और अव्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त
    उधर मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ रहे बैटरी चलित ई-रिक्शा और यातायात व्यवस्था पर पड़ रहे असर को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए अंतिम मोहलत दी है। हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया गया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा बिना परमिट के संचालित हो रहे हैं। लगातार बढ़ती संख्या के कारण शहरों में ट्रैफिक जाम, अव्यवस्था और दुर्घटनाओं की समस्या बढ़ रही है। उज्जैन शहर में हजारों ई-रिक्शा चल रहे हैं। सड़कों पर इनकी संख्या बढऩे से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई जगह नाबालिग और बिना लाइसेंस वाले चालक भी ई-रिक्शा चला रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है। भारत सरकार के 2018 के नोटिफिकेशन के तहत ई-रिक्शा और बैटरी चलित वाहनों को मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 के तहत परमिट की अनिवार्यता से छूट दी गई थी। इसी छूट का दुरुपयोग हो रहा है और बड़ी संख्या में बिना नियमों के वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ई-रिक्शा को दी गई छूट के कारण शहरों में वाहनों की बाढ़ आ गई है। हर सड़क पर ई-रिक्शा दिखाई दे रहे हैं और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

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