img-fluid

100 किमी तक मार करने वाले हथियारों पर भारत का फोकस, 52 हजार करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी

July 05, 2026

नई दिल्ली। आधुनिक युद्ध (Modern Warfare) की बदलती चुनौतियों को देखते हुए भारत अब केवल लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों और बड़े रक्षा प्लेटफॉर्म पर ही नहीं, बल्कि कम दूरी में प्रभावी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। इसी दिशा में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने करीब 52,000 करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी दी है, जिसमें शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, एंटी-टैंक मिसाइल और कामिकाजे ड्रोन जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं।

पिछले कुछ वर्षों में रक्षा खरीद में लड़ाकू विमान, युद्धपोत, लंबी दूरी की मिसाइलें और बड़े ड्रोन सिस्टम प्रमुख रहे हैं। लेकिन इस बार मंजूर प्रस्तावों से संकेत मिलता है कि भारतीय सेनाएं बदलते युद्ध स्वरूप के अनुरूप कम दूरी के हथियारों और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली प्रणालियों को भी अपनी ताकत का अहम हिस्सा बना रही हैं।

बदलते युद्ध के स्वरूप पर नजर

हाल के वर्षों में सीमाई तनाव और ड्रोन तथा मिसाइलों के बढ़ते इस्तेमाल ने यह स्पष्ट किया है कि भविष्य के संघर्ष केवल पारंपरिक मोर्चों तक सीमित नहीं रहेंगे। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि दुश्मन महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के साथ-साथ नागरिक क्षेत्रों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में कम दूरी की वायु रक्षा प्रणालियां और तेज प्रतिक्रिया देने वाले हथियारों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।



  • दो मोर्चों की चुनौती को ध्यान में रखकर तैयारी

    भारत लंबे समय से दो मोर्चों पर संभावित सुरक्षा चुनौतियों को अपनी रणनीतिक योजना का हिस्सा मानता रहा है। पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए सेना अपनी तैयारियों को लगातार मजबूत कर रही है। दोनों पड़ोसी देशों के पास परमाणु क्षमता होने के कारण भारत किसी भी स्तर पर अपनी रक्षा व्यवस्था में कमजोरी नहीं छोड़ना चाहता।

    तीनों सेनाओं की क्षमता बढ़ाने पर जोर

    रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस खरीद का उद्देश्य थल सेना, वायु सेना और नौसेना की संयुक्त परिचालन क्षमता को और मजबूत बनाना है। नई प्रणालियों के शामिल होने से तीनों सेनाओं की त्वरित प्रतिक्रिया, सटीक हमले और हवाई सुरक्षा क्षमताओं में सुधार होगा। यह फैसला इस बात का संकेत भी है कि भारत भविष्य के तकनीक-आधारित युद्धों के लिए अपनी सैन्य तैयारियों को लगातार आधुनिक बना रहा है।

    आधुनिक युद्ध में तकनीक होगी निर्णायक

    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में युद्ध का परिणाम केवल लड़ाकू विमानों या पारंपरिक हथियारों से तय नहीं होगा। ड्रोन, प्रिसीजन-गाइडेड मिसाइलें, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, स्वायत्त हथियार प्रणाली, साइबर सुरक्षा और आधुनिक सैनिक उपकरण भविष्य के संघर्षों में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। इसी रणनीति को ध्यान में रखते हुए भारत अपनी रक्षा क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

    ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव

    हालिया ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन और मिसाइलों से जुड़े खतरों ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में हाइब्रिड युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है। इसके बाद भारत ने अपनी वायु रक्षा और निगरानी प्रणालियों को और मजबूत करने की दिशा में कदम तेज किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि देश के भीतर महत्वपूर्ण ठिकानों, सैन्य प्रतिष्ठानों और नागरिक क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए भी बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली विकसित करना समय की जरूरत है।

    Share:

  • दिल्ली पुलिस-हरियाणा STF की संयुक्त कार्रवाई, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो शूटर मुठभेड़ में ढेर

    Sun Jul 5 , 2026
    नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (Delhi Police Special Cell) और हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त कार्रवाई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग (Lawrence Bishnoi gang) से जुड़े दो कथित शूटर मुठभेड़ में मारे गए। पुलिस के अनुसार, दोनों पर हरियाणा के हांसी में जिम संचालक कपिल की हत्या का आरोप था। मुठभेड़ के […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved