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देश में 10 साल में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, रोजाना औसतन 25 स्कूलों पर लगा ताला, नामांकन घटा

July 10, 2026

नई दिल्ली। देश में सरकारी स्कूलों (Government Schools) की संख्या लगातार घट रही है। नीति आयोग (NITI Aayog) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में भारत (India) में करीब 94 हजार सरकारी स्कूल बंद (School Closed) हो चुके हैं। यानी औसतन हर दिन 25 सरकारी स्कूलों पर ताला लगा। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान सरकारी स्कूलों में छात्रों के नामांकन में भी 2.26 करोड़ की गिरावट दर्ज की गई है।

एक दशक में सरकारी स्कूलों की संख्या घटी
‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया: टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप फॉर क्वालिटी एनहांसमेंट’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014-15 में देश में 11.07 लाख सरकारी स्कूल थे, जिनकी संख्या 2024-25 तक घटकर 10.13 लाख रह गई।

इसी अवधि में सरकारी सहायता प्राप्त (एडेड) स्कूलों की संख्या भी 83 हजार से घटकर 79 हजार रह गई। इसके विपरीत निजी स्कूलों की संख्या 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख हो गई।

छात्रों का नामांकन भी घटा
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014-15 में देशभर के स्कूलों में कुल 26.95 करोड़ छात्र नामांकित थे, जबकि 2024-25 में यह संख्या घटकर 24.69 करोड़ रह गई। यानी एक दशक में 2.26 करोड़ छात्रों का नामांकन कम हुआ है।


  • क्यों घट रही है बच्चों की संख्या?
    नीति आयोग ने नामांकन में गिरावट के पीछे कई कारण बताए हैं। इनमें घटती प्रजनन दर के कारण स्कूली उम्र के बच्चों की आबादी में कमी, स्कूलों का आपस में विलय (स्कूल कंसॉलिडेशन) और उच्च कक्षाओं तक छात्रों को बनाए रखने की चुनौती प्रमुख हैं।

    स्कूलों के विलय पर उठे सवाल
    रिपोर्ट के अनुसार, कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को आपस में मिलाकर संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से स्कूल कंसॉलिडेशन नीति लागू की गई। हालांकि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पड़ोस के स्कूल बंद होने से कई बच्चों, खासकर लड़कियों के लिए स्कूल की दूरी बढ़ गई, जिसके चलते कई विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी।

    बड़ी कक्षाओं में बढ़ रही ड्रॉपआउट दर
    रिपोर्ट में माध्यमिक स्तर पर बढ़ती ड्रॉपआउट दर को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। पहली से पांचवीं कक्षा तक स्कूल छोड़ने की दर केवल 0.3 प्रतिशत है, लेकिन छठी से आठवीं कक्षा में यह बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो जाती है। वहीं नौवीं और दसवीं तक पहुंचते-पहुंचते ड्रॉपआउट दर 11.5 प्रतिशत दर्ज की गई है।

    आठवीं से नौवीं कक्षा में प्रवेश लेने वाले छात्रों की दर भी 2014-15 के 91.58 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 86.6 प्रतिशत रह गई है। पुडुचेरी और केरल में यह दर 99.6 प्रतिशत है, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में यह अपेक्षाकृत कम है।

    यूपी और एमपी में सबसे अधिक स्कूल मर्ज
    रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सबसे बड़े स्तर पर स्कूलों का विलय किया गया। दोनों राज्यों में मिलाकर करीब 40 हजार स्कूल बंद या अन्य स्कूलों में मर्ज किए गए हैं।

    9वीं के छात्रों की बुनियादी पढ़ाई भी कमजोर
    रिपोर्ट में माध्यमिक स्तर पर छात्रों की सीखने की क्षमता को लेकर भी चिंता जताई गई है। मूल्यांकन में पाया गया कि कक्षा 9 के कई विद्यार्थियों को बीजगणित और ज्यामिति जैसे विषयों के साथ-साथ प्रतिशत, भिन्न और अनुपात जैसी बुनियादी गणितीय अवधारणाओं को समझने में भी कठिनाई हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार यह शुरुआती कक्षाओं में सीखने की कमियों के लंबे समय तक बने रहने का संकेत है।

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