img-fluid

चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी, 35 देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ा रहा भारत; क्रिटिकल मिनरल्स पर फोकस

July 10, 2026

नई दिल्ली। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply chain) में बढ़ती अनिश्चितता और महत्वपूर्ण खनिजों (Supply chain) पर चीन (China) के मजबूत नियंत्रण के बीच भारत वैकल्पिक आपूर्ति नेटवर्क तैयार करने में जुटा है। सरकार का लक्ष्य ऐसे देशों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करना है, जहां लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की औद्योगिक और रणनीतिक जरूरतों के लिए आपूर्ति अधिक सुरक्षित हो सकेगी।

क्यों अहम हैं क्रिटिकल मिनरल्स?

क्रिटिकल मिनरल्स आधुनिक तकनीक और ऊर्जा परिवर्तन की रीढ़ माने जाते हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, सेमीकंडक्टर, सोलर पैनल, पवन ऊर्जा उपकरण, एयरोस्पेस, दूरसंचार, रक्षा उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में होता है। यही कारण है कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इन संसाधनों की सुरक्षित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दे रही हैं।

चीन का दबदबा क्यों चुनौती बना?

वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग में चीन की बड़ी हिस्सेदारी है। कई देशों में खनिजों का खनन तो होता है, लेकिन उनकी प्रोसेसिंग के लिए वे चीन पर निर्भर रहते हैं। इसी वजह से हाल के वर्षों में चीन के निर्यात नियंत्रण और भू-राजनीतिक तनाव ने कई देशों को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने के लिए प्रेरित किया है।


  • भारत ने बनाया बहु-देशीय नेटवर्क

    रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने पिछले दो वर्षों में क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में लगभग 35 देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम किया है। इनमें से 24 देशों के साथ विभिन्न स्तरों पर समझौते या साझेदारी हो चुकी है, जबकि 11 अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है।

    इस नेटवर्क में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली और कांगो जैसे देश शामिल हैं। वहीं चिली, पेरू, जाम्बिया, कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान सहित कई देशों के साथ भी सहयोग पर चर्चा चल रही है।

    इंडोनेशिया से मिला रणनीतिक सहयोग

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े निकेल उत्पादक देशों में शामिल है और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए यह धातु बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत भारत इंडोनेशिया में इस्पात, निकेल और रेयर अर्थ मैग्नेट से जुड़े विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर काम करेगा।

    ऑस्ट्रेलिया के साथ भी मजबूत हो रहा सहयोग

    इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख लिथियम उत्पादकों में शामिल है और भारत पहले से ही इस क्षेत्र में उसके साथ सहयोग बढ़ा रहा है। लिथियम इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों और ऊर्जा भंडारण तकनीक का प्रमुख घटक है।

    दीर्घकालिक रणनीति पर काम

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह रणनीति केवल चीन पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य भविष्य की औद्योगिक जरूरतों, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा उत्पादन के लिए आवश्यक खनिजों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना भी है। साथ ही, इससे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र, स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं और उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों को भी दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    Share:

  • बंगालः TMC के फ्रीज खातों पर घमासान... कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ SC जाएगा बागी गुट

    Fri Jul 10 , 2026
    कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress- TMC) के बैंक खातों के फ्रीज होने के बाद से सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य के नेता प्रतिपक्ष रितब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) ने गुरुवार को ऐलान किया है कि उनका गुट कोलकाता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved