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दुनिया में रहने लायक सबसे अच्छे शहरों की सूची में दिल्ली 120वें स्थान पर, मुम्बई उससे भी पीछे

July 10, 2026

नई दिल्ली। दुनिया भर में रहने के लिहाज से सबसे अच्छे शहरों (Best Cities) की ताजा लिस्ट आ गई है। इस हफ्ते ‘द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट’ ने अपनी नई ‘ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026’ (Global Liveability Index 2026) रिपोर्ट जारी की है। इस सूचकांक में कुल 173 शहरों को वहां मौजूद सुविधाओं और रहने की स्थितियों के अलग-अलग पैमानों पर परखा गया है। अगर भारतीय शहरों की बात करें तो नई दिल्ली (New Delhi) को 120वां स्थान मिला है। वहीं, डेनमार्क का शहर कोपेनहेगन (Copenhagen) दुनिया के सबसे बेहतरीन और रहने लायक शहरों की लिस्ट में नंबर वन पर बरकरार है। कोपेनहेगन ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना को पीछे छोड़ते हुए अपना पहला स्थान बरकरार रखा है। द इकोनॉमिस्ट मैगजीन की सहयोगी संस्था ईआईयू ने दुनिया भर के 173 शहरों को शिक्षा, स्थिरता, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्कृति जैसे पैमानों पर परखा है।


  • भारतीय शहरों की रैंकिंग
    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्रमुख शहरों की रैंकिंग कुछ इस प्रकार है:
    – नई दिल्ली: 120वें पायदान पर
    – मुंबई: 121वें पायदान पर
    – चेन्नई: 123वें पायदान पर
    – बेंगलुरु: 127वें पायदान पर

    गौर करने वाली बात यह है कि देश की राजधानी नई दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई की रैंकिंग में पिछले साल के मुकाबले कोई बदलाव नहीं आया है। ये दोनों शहर अपनी पुरानी स्थिति पर ही बने हुए हैं।

    दुनिया के 10 सबसे बेहतरीन शहर
    रहने के लिहाज से डेनमार्क के कोपेनहेगन ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है:

    कोपेनहेगन क्यों है नंबर वन?
    रिपोर्ट के मुताबिक, कोपेनहेगन को स्थिरता, इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा के मामले में “परफेक्ट” स्कोर मिला है। ईआईयू के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस शहर की शानदार स्थिरता और बुनियादी ढांचे के साथ-साथ बेहतरीन संस्कृति, पर्यावरण और उच्च गुणवत्ता वाली सार्वजनिक सेवाओं के बेजोड़ तालमेल ने इसे शीर्ष पर बनाए रखा है।

    अमेरिका और कनाडा का क्या है हाल?
    टॉप-10 की ग्लोबल लिस्ट में उत्तरी अमेरिका का केवल एक शहर जगह बना पाया है, और वह है कनाडा का वैंकूवर (9वां स्थान)। अगर अमेरिकी शहरों की बात करें तो न्यूयॉर्क तीन पायदान की छलांग लगाकर 66वें नंबर पर आ गया है। अपराध दर में कमी और आतंकी घटनाओं के कम होते खतरे की वजह से इसके ‘स्टेबिलिटी स्कोर’ में काफी सुधार हुआ है। हालांकि, दो पायदान नीचे खिसकने के बावजूद होनोलूलू (25वां स्थान) अभी भी अमेरिका का सबसे ऊंची रैंकिंग वाला शहर बना हुआ है।

    एशिया के स्कोर में सुधार, यूरोप में ठहराव
    इंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी यूरोप अभी भी रहने के लिहाज से दुनिया का सबसे शानदार क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि अब इसके औसत स्कोर में एक ठहराव आ गया है। इसके उलट, एशिया के औसत स्कोर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2025 की तुलना में इस बार चीन के 10 शहरों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि ईरान युद्ध की वजह से पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हुई है।

    एशिया के हेल्थकेयर में सुधार से रैंकिंग उछली
    इस साल एशिया के औसत लिवेबिलिटी स्कोर में 0.3 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह 73.9 हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां की स्वास्थ्य सेवाओं (हेल्थकेयर) का मजबूत होना है। चीन के कई शहरों की रैंकिंग में भी उछाल आया है, जैसे फुझोऊ सात पायदान चढ़कर 93वें नंबर पर पहुंच गया है। ईआईयू की इंडस्ट्री डायरेक्टर एना निकोल्स के मुताबिक, एशिया के स्कोर में बढ़ोतरी का नतीजा यह है कि अब टॉप-20 में यूरोप के सात शहरों के साथ एशिया के नौ शहर शामिल हो गए हैं। वहीं, पश्चिमी यूरोप अभी भी रहने के लिहाज से सबसे मजबूत क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि पिछले साल के मुकाबले इसका औसत स्कोर थोड़ा गिरकर 91.7 हो गया है।

    युद्ध की वजह से खाड़ी देशों को भारी नुकसान
    ईरान युद्ध के नतीजे खाड़ी (गल्फ) क्षेत्र के शहरों की रैंकिंग में साफ दिखाई दे रहे हैं, जहां स्थिरता स्कोर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मस्कट 14 पायदान गिरकर 123वें नंबर पर और कुवैत सिटी 12 स्थान खिसककर 105वें नंबर पर आ गया है। लिस्ट में सबसे नीचे सीरिया का दमिश्क शहर है, जो अभी भी दुनिया में रहने के लिहाज से सबसे खराब शहर माना गया है। इसके अलावा, युद्ध के कारण ईरान की राजधानी तेहरान खिसककर 164वें और यूक्रेन का कीव 166वें नंबर पर पहुंच गया है।

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