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योगिनी एकादशी: पढ़ें ये पौराणिक व्रत कथा, भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए जानें पूजा विधि

July 10, 2026

नई दिल्ली। सनातन धर्म (Sanatan Dharm) में प्रत्येक एकादशी (Ekadashi) का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा करने से हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन योगिनी एकादशी की व्रत कथा का श्रवण और पाठ भी विशेष फलदायी माना जाता है।

योगिनी एकादशी की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को योगिनी एकादशी का महत्व बताते हुए यह कथा सुनाई थी। स्वर्गलोक में अलकापुरी नामक नगरी पर धन के देवता कुबेर का शासन था। वे भगवान शिव के परम भक्त थे। उनके यहां हेम नाम का एक माली प्रतिदिन मानसरोवर से पूजा के लिए पुष्प लाया करता था। हेम अपनी अत्यंत सुंदर पत्नी विशालाक्षी से बहुत प्रेम करता था।

एक दिन हेम फूल तो ले आया, लेकिन पत्नी के प्रेम में इतना मग्न हो गया कि समय पर भगवान शिव की पूजा के लिए पुष्प नहीं पहुंचा सका। इससे क्रोधित होकर कुबेर ने उसे श्राप दिया कि वह अपनी पत्नी से अलग होकर पृथ्वी पर कोढ़ी के रूप में जीवन बिताएगा।

श्राप के प्रभाव से हेम तत्काल स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरा। उसका शरीर कोढ़ से ग्रस्त हो गया और पत्नी भी उससे बिछड़ गई। लंबे समय तक कष्ट झेलने के बाद एक दिन वह महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने उसकी दयनीय स्थिति का कारण पूछा, तब हेम ने पूरी घटना सुनाई।


  • हेम की व्यथा सुनकर महर्षि मार्कण्डेय ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। हेम ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उसका श्राप समाप्त हो गया, उसे अपना पूर्व स्वरूप वापस मिला और वह अपनी पत्नी के साथ पुनः सुखपूर्वक रहने लगा। इसी कारण योगिनी एकादशी को पापों से मुक्ति, रोगों से राहत और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है।

    योगिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि
    योगिनी एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र विराजमान करें। श्रद्धापूर्वक भगवान को पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित करें तथा दीप प्रज्ज्वलित कर आरती करें। गुड़ और चने का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।

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