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महात्मा गांधी के लिखे पत्र से लेकर मुगलकालीन नक्शे तक, इंदौर रीजन पांडुलिपियों के मामले में रहा आगे

July 10, 2026

  • सत्यापन का काम शुरू… इंदौर से मिली हस्तलिखित प्राचीन रामायण, बुरहानपुर से गुरु ग्रंथ साहिब

इंदौर, नासेरा मंसूरी। भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत पांडुलिपियों को सहेजने के लिए चलाए जा रहे अभियान में देशभर में मध्यप्रदेश पहले नंबर पर रहा है। प्रदेश से ‘ज्ञान भारतम् ऐप’ पर 34 लाख से ज्यादा प्राचीन पांडुलिपियां रजिस्टर्ड हुई हैं। इसमें इंदौर रीजन भी पीछे नहीं रहा है। इंदौर से हस्तलिखित प्राचीन रामायण, बुरहानपुर से भागवत गीता, धार से मुगलकालीन नक्शा और ऐसे ही कई प्राचीन ग्रंथ और पांडुलिपियां मिली हैं, जिसने इंदौर को प्रदेश में दूसरे स्थान पर पहुंचाया है। इंदौर रीजन के बड़वानी से महात्मा गांधी के हस्तलिखित पत्र मिले हैं, तो धार से मुगलकालीन नक्शा।

पहले चरण में अब तक प्रदेश में 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपियों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है और अब अगले चरण में इनका सत्यापन चल रहा है। प्रदेश में इस अभियान के लिए पुरातत्व विभाग नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रहा है। विभाग ने इंदौर रीजन के कई शहरों से सैकड़ों पांडुलिपियों और प्राचीन ग्रंथों को ऐप पर रजिस्टर्ड किया है। विभाग के इंदौर रीजन के अंतर्गत 13 से ज्यादा शहर आते हैं, जिसमें से कुछ शहरों से अतिप्राचीन ग्रंथ सहेजे मिले हैं। कुछ मंदिरों, कुछ लाइब्रेरी से हैं, तो कुछ ग्रंथ लोगों की निजी संपत्ति के तौर पर दर्ज हुए हैं। इस डिजिटल खोज और रजिस्ट्रेशन कैंपेन के दौरान रीजन के कई जिलों से ऐसी ऐतिहासिक सामग्रियां मिली हैं, जो शोधकर्ताओं को भी हैरान कर रही हैं। इंदौर से 3,99,477 का रजिस्ट्रेशन किया गया है।


  • अधिकारी पहुंचे थे शहरों में
    यूं तो हर जिले में इसके लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है, लेकिन इन पांडुलिपियों और प्राचीन ग्रंथों को खोजने के लिए विभाग ने भी अपनी टीम को जिम्मेदारी दी थी। इंदौर रीजन के खरगोन से पुरानी वस्तुओं को एकत्रित करने वाले एक शौकिया के पास से 15 फीट लंबी एक हस्तलिखित पत्रिका मिली है, जो किसी की जन्मकुंडली प्रतीत होती है। हालांकि, ये अभी स्पष्ट नहीं है और ये भी पता नहीं चल पाया है कि ये कितनी प्राचीन है। ऐसे ही बड़वानी से 19वीं शताब्दी के शुरुआत में लिखा गया महात्मा गांधी का एक पत्र मिला है। एक संभावित यात्रा के संबंध में गुजराती में ये पत्र खुद महात्मा गांधी ने लिखा था। धार से अरबी में लिखा एक मुगलकालीन नक्शा मिला है, जो पूरे धार क्षेत्र को दिखा रहा है, वहीं धार कलेक्टर ऑफिस की लाइब्रेरी से कई प्राचीन पांडुलिपियां मिली हैं।

    250 साल पुरानी भागवत गीता
    इंदौर में संस्कृत में लिखी प्राचीन हस्तलिखित रामायण मिली है, जो एक नागरिक की निजी सम्पत्ति है। बताते हैं कि ये रामायण उनकी पारिवारिक विरासत है। ऐसे ही बुरहानपुर के राधावल्लभ मंदिर से 250 साल पुराना हस्तलिखित और 20 फीट लंबा प्राचीन श्रीमद्भागवत महापुराण ग्रंथ मिला है, जिसे सुरक्षित कर लिया गया है। यहीं के गुरुद्वारे से गुरु गोबिंदसिंह के हाथों लिखे और उनके हस्ताक्षरित गुरुग्रंथ साहिब मिले हैं, जो यहां केवल प्रकाश पर्व के मौके पर निकाले जाते हैं।

    आम नागरिक भी कर सकते हैं अपलोड
    यदि किसी प्राचीन परिवार, मठ या संस्था के पास कोई भी पुरानी हस्तलिखित पोथी, ताम्रपत्र या ग्रंथ उपलब्ध है, तो वे सीधे इस ऐप पर उसकी जानकारी देकर भारत सरकार की मदद से उसका नि:शुल्क डिजिटलीकरण और संरक्षण करवा सकते हैं। इसके लिए उन्हें बस ऐप डाउनलोड करना होगा।

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