नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में राजनीतिक और सामाजिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान सरकार (Government of Pakistan) को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उसकी 38 सूत्री मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। संगठन ने मुजफ्फराबाद की ओर बड़े जन-मार्च का भी ऐलान किया है।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
PoK में 27 जुलाई को प्रस्तावित क्षेत्रीय चुनावों से पहले यह घटनाक्रम सामने आया है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बीच JAAC ने कहा है कि उसकी मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन का दावा है कि यह अभियान राजनीतिक अधिकारों और स्थानीय हितों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है।
विरोध का सबसे बड़ा मुद्दा पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटें हैं। JAAC का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद को स्थानीय राजनीति में प्रभाव बनाए रखने का अवसर मिलता है।
वहीं, इन सीटों के समर्थकों का तर्क है कि पाकिस्तान में बसे विस्थापित कश्मीरियों को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हाल ही में PoK की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इन सीटों को समाप्त करने के लिए केवल प्रशासनिक आदेश पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संवैधानिक संशोधन आवश्यक होगा।
JAAC की प्रमुख मांगें
संगठन की 38 सूत्री मांगों में कई आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दे शामिल हैं। इनमें प्रमुख मांगें हैं—
शरणार्थी सीटों की व्यवस्था पर पुनर्विचार।
जलविद्युत परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को अधिक लाभ और हिस्सेदारी।
बिजली दरों में कमी।
आटा, चीनी और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर राहत।
प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा स्थानीय विकास पर खर्च करना।
सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं में सुधार।
युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना।
स्थानीय संसाधनों को लेकर असंतोष
JAAC और अन्य स्थानीय समूहों का कहना है कि PoK प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य संसाधनों से होने वाले राजस्व का अधिकांश हिस्सा स्थानीय आबादी तक नहीं पहुंचता।
संवैधानिक व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
PoK की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी समय-समय पर बहस होती रही है। स्थानीय राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अधिक स्वायत्तता तथा निर्णय प्रक्रिया में स्थानीय भागीदारी बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान का कहना है कि क्षेत्र की संवैधानिक व्यवस्था कानून के अनुरूप संचालित हो रही है।
आगे क्या?
48 घंटे की समयसीमा पूरी होने के बाद JAAC की अगली रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि संगठन अपने घोषित कार्यक्रम के अनुसार बड़े पैमाने पर विरोध मार्च शुरू करता है, तो चुनाव से पहले PoK में राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो सकता है। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से JAAC के अल्टीमेटम पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved