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भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू, GTRI बोला- सिर्फ CETA नहीं, गुणवत्ता सुधार से मिलेगा पूरा फायदा

July 12, 2026

नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाला व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई से प्रभावी होने जा रहा है। इस समझौते से भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। हालांकि, आर्थिक शोध संस्था ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का मानना है कि केवल शुल्क में राहत मिलने से निर्यात में स्वतः बड़ी बढ़ोतरी नहीं होगी। इसके लिए भारतीय उद्योगों को गुणवत्ता, प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक मानकों पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर जरूर खोलता है, लेकिन यदि उत्पादों की गुणवत्ता, आपूर्ति शृंखला और नियामकीय आवश्यकताओं में सुधार नहीं हुआ तो इन अवसरों का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।

गुणवत्ता और मानकों पर रहेगा सबसे बड़ा जोर

रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में केवल शुल्क में कमी पर्याप्त नहीं होती। कई क्षेत्रों में गुणवत्ता मानक, खाद्य सुरक्षा नियम, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, व्यापार सुरक्षा उपाय और मजबूत आपूर्ति व्यवस्था कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जीटीआरआई का कहना है कि भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन के नियामकीय मानकों का पालन करने के साथ-साथ खरीदारों के साथ मजबूत कारोबारी नेटवर्क भी विकसित करना होगा।


  • इन क्षेत्रों को मिल सकता है सबसे ज्यादा लाभ

    रिपोर्ट के अनुसार, जिन क्षेत्रों में भारत की उत्पादन क्षमता मजबूत है और ब्रिटेन में अच्छी मांग मौजूद है, वहां इस समझौते का सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से—

    परिधान और वस्त्र उद्योग
    चमड़ा एवं फुटवियर
    प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद
    समुद्री उत्पाद
    कुछ कृषि उत्पाद
    वाहन, मोटरसाइकिल और उनके कलपुर्जे

    हालांकि, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स के निर्यातकों को तकनीकी मानकों और ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ जैसी शर्तों का पालन करना होगा।

    इस्पात, पेट्रोलियम और शराब में सीमित असर

    जीटीआरआई का आकलन है कि इस्पात, पेट्रोलियम और शराब जैसे क्षेत्रों में इस समझौते का प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहेगा। संस्था का कहना है कि इन क्षेत्रों में केवल शुल्क में कमी से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करना आसान नहीं होगा।

    ब्रिटेन के आयात में भारत की हिस्सेदारी अभी भी कम

    रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में ब्रिटेन ने दुनिया भर से 928.9 अरब डॉलर का सामान आयात किया, जबकि भारत से आयात का मूल्य केवल 15.2 अरब डॉलर रहा। यानी ब्रिटेन के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी महज 1.6 प्रतिशत थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा बताता है कि भारत के पास अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप उत्पादन पर विशेष ध्यान देना होगा।

    खाद्य और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए अलग चुनौती

    जीटीआरआई ने सुझाव दिया है कि खाद्य उत्पादों के निर्यातकों को ब्रिटेन के सख्त खाद्य सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा। वहीं मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल करने के साथ-साथ विदेशी खरीदारों के साथ मजबूत कारोबारी संबंध विकसित करने होंगे।

    रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारत-ब्रिटेन सीईटीए व्यापार बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब भारतीय उद्योग वैश्विक गुणवत्ता मानकों, बेहतर लॉजिस्टिक्स और मजबूत आपूर्ति व्यवस्था के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार होंगे।

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