भुवनेश्वर। केन्या में आयोजित एक रथ यात्रा कार्यक्रम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) से जुड़े श्रद्धालुओं और पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर से जुड़े लोगों ने इस्कॉन द्वारा पारंपरिक तिथियों से अलग समय पर आयोजित रथ यात्रा और उसमें भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों की भागीदारी पर आपत्ति जताई है। इस मुद्दे को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से हस्तक्षेप करने की मांग भी की गई है।
पद्मश्री सम्मानित रेत कलाकार और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति के पूर्व सदस्य सुदर्शन पटनायक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विदेशों में आयोजित होने वाली रथ यात्राएं भी पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर की पारंपरिक तिथियों और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए।
उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से आग्रह किया कि भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों के अधिकारियों को केवल उन्हीं रथ यात्रा आयोजनों में शामिल होने की सलाह दी जाए, जो पुरी की परंपरा के अनुसार आयोजित किए जाते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, केन्या में आयोजित रथ यात्रा के दौरान भारतीय उच्चायोग के कुछ अधिकारियों ने कार्यक्रम में भाग लिया और रथ भी खींचा। कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें भारतीय मिशन के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा की गईं। इसी को लेकर कुछ श्रद्धालुओं ने सवाल उठाए हैं और कहा है कि किसी भी आधिकारिक भागीदारी से पहले धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
इस बीच, पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति ने इस्कॉन से विदेशों में भी पुरी की निर्धारित तिथियों के अनुसार रथ यात्रा आयोजित करने का अनुरोध किया था।
उनके अनुसार, 4 जुलाई को इस्कॉन के नए अध्यक्ष को भेजे गए पत्र के जवाब में 7 जुलाई को संगठन ने स्पष्ट किया कि वह भारत के बाहर अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही रथ यात्रा आयोजित करता रहेगा और उसी व्यवस्था को जारी रखेगा।
गजपति महाराज ने कहा कि इस विषय पर अब ओडिशा सरकार से चर्चा के बाद केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रथ यात्रा उत्सव समाप्त होने के बाद श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से मुलाकात करेगा और इस मामले में हस्तक्षेप का औपचारिक अनुरोध करेगा।
फिलहाल, यह विवाद धार्मिक परंपराओं, विदेशों में आयोजित होने वाले आयोजनों की समय-सीमा और उनमें भारतीय राजनयिक संस्थानों की भूमिका को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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