तेहरान। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने निजी स्तर पर अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क कर इस घटना को लेकर अपनी “चूक” स्वीकार की है और बातचीत का सिलसिला जारी रखने की इच्छा जताई है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि न तो ईरान और न ही अमेरिका की ओर से सार्वजनिक रूप से की गई है।
अमेरिकी मीडिया सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरानी प्रतिनिधियों ने बंद कमरे में हुई बातचीत के दौरान कहा कि होर्मुज में हुई घटना एक बड़ी गलती थी और दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता बाधित नहीं होनी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने कथित तौर पर यह भी कहा कि जहाजों पर हमला उनकी सरकार या नियमित सैन्य नेतृत्व का निर्णय नहीं था। उनका दावा है कि यह कार्रवाई देश के भीतर मौजूद एक कट्टरपंथी गुट ने की, जिसका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते तथा शांति वार्ता को पटरी से उतारना था।
वहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी पक्ष चाहता है कि यदि ईरान वास्तव में इस घटना को गलती मानता है तो वह सार्वजनिक रूप से भी अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए एक विशेष टीम को जिम्मेदारी सौंपी है। इस टीम में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ट्रंप के दामाद जरेड कुशनर शामिल बताए गए हैं।
बताया गया है कि टीम का उद्देश्य तनाव कम करना और दोनों देशों के बीच बातचीत को जारी रखना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच ओमान में एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जहां क्षेत्रीय तनाव और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि ईरानी प्रतिनिधियों ने वार्ता जारी रखने की इच्छा जताते हुए कहा कि घटना को लेकर उनसे गंभीर चूक हुई।
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि विवाद की एक वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की बढ़ती आवाजाही थी। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का मानना था कि शुरुआती सहमति के तहत ओमान के तट से गुजरने वाला दक्षिणी समुद्री मार्ग वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला रहेगा।
हालांकि, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तेल और गैस से लदे जहाजों की अपेक्षा से अधिक आवाजाही देखकर ईरान ने अपनी रणनीति बदली और बाद में कुछ जहाजों को निशाना बनाया। इस दावे की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
फिलहाल, पूरे घटनाक्रम को लेकर दोनों देशों की ओर से आधिकारिक और सार्वजनिक बयान का इंतजार है। ऐसे में रिपोर्ट में किए गए दावों की पुष्टि भविष्य में सामने आने वाली सरकारी प्रतिक्रियाओं और जांच के बाद ही हो सकेगी।
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