
- बैठक में फैसला, 5 एलईडी रथ, 15 मेडिकल पॉइंट, थीम आधारित झांकियां और सवारी मार्ग पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी
उज्जैन। भगवान महाकालेश्वर की श्रावण-भादौ मास की पहली सवारी 3 अगस्त से शुरू होगी, जबकि अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर को निकलेगी। श्रावण में चार और भादौ में दो सवारियां निकाली जाएंगी। इसे लेकर विगत दिवस महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। उन्होंने सभी विभागों को समय-सीमा में तैयारियां पूरी करने के निर्देश देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित दर्शन कराना सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
बैठक में तय किया गया कि इस बार भी प्रत्येक सवारी थीम आधारित होगी। जनजातीय सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां, आकर्षक झांकियां और श्रद्धालुओं के लिए पांच एलईडी रथ शामिल किए जाएंगे, ताकि दूर खड़े श्रद्धालु भी भगवान महाकाल के दर्शन कर सकें। सवारी मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, बैरिकेडिंग, सफाई, पेयजल, चिकित्सा और निर्बाध बिजली व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 15 स्थानों पर मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी तथा 24 घंटे एंबुलेंस सेवा उपलब्ध रहेगी। श्रावण-भादौ के दौरान मंदिर के पट प्रतिदिन सुबह 3 बजे खुलेंगे, जबकि प्रत्येक सोमवार को भस्म आरती के लिए पट 2.30 बजे खुलेंगे। सामान्य दर्शन त्रिवेणी संग्रहालय की ओर से निर्धारित मार्ग से होंगे, जबकि शीघ्र दर्शन के लिए गेट नंबर 1 और 5 से प्रवेश मिलेगा। जल अर्पण की व्यवस्था सभामंडप और कार्तिकेय मंडपम में जलपात्रों के माध्यम से रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सात स्थानों पर जूता स्टैंड और छह स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था भी की जाएगी। कांवड़ यात्रियों को मंगलवार से शुक्रवार तक विशेष मार्ग से प्रवेश देकर जल अर्पण कराया जाएगा। शनिवार, रविवार और सोमवार को अधिक भीड़ के कारण किसी भी कांवड़ दल को अनुमति नहीं दी जाएगी। बैठक में यह भी तय हुआ कि सावन के तीसरे सोमवार को नागचंद्रेश्वर दर्शन और सवारी एक साथ होने की स्थिति में अलग से व्यवस्था तय की जाएगी। सवारी मार्ग पर दिशा-सूचक बोर्ड, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, कार्यपालिक दंडाधिकारियों की तैनाती तथा नगर निगम द्वारा सुरक्षा और सफाई की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी।
महाकाल सवारी के लिए महापौर ने दिया सुझाव
महापौर मुकेश टटवाल ने श्रावण मास में निकलने वाली भगवान महाकाल की शाही सवारी की व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव दिए हैं। उन्होंने इस संबंध में जिला कलेक्टर और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष को एक पत्र भेजा है। टटवाल ने सुझाव दिया है कि पुलिस द्वारा पालकी के चारों ओर एक चौड़ा और सख्त सुरक्षा घेरा बनाया जाए। इसका उद्देश्य अनावश्यक भीड़ को पालकी के पास आने से रोकना है। उन्होंने कहा कि पालकी के बिल्कुल करीब केवल उन्हीं लोगों को अनुमति मिलनी चाहिए जिनकी धार्मिक या प्रशासनिक रूप से वास्तविक आवश्यकता हो।