
उज्जैन। अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाने वाले बाबा श्री महाकाल की महिमा निराली है। प्रतिदिन धार्मिक नगरी उज्जैन में लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। इस बीच श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा बाबा महाकाल की संपत्ति का विवरण सार्वजनिक किया गया है। इसके अनुसार, बाबा महाकाल के नाम पर लगभग 472 करोड़ रुपये की एफडी, करीब 90 करोड़ रुपये मूल्य की बेशकीमती जमीन और लगभग 16 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न बैंकों में जमा है।
बाबा महाकाल के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति दर्ज
प्रतिदिन सुबह चार बजे होने वाली भस्म आरती में भक्तों को दर्शन देने वाले बाबा महाकाल के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति दर्ज है। उनके नाम पर करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन, बैंक एफडी और नकद राशि जमा है। इसके बावजूद प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और उनके दान से मंदिर की संपत्ति में लगातार वृद्धि हो रही है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में महाकालेश्वर मंदिर के नाम पर लगभग 472 करोड़ रुपये की एफडी है। वर्ष 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। इसके साथ ही मंदिर में मिलने वाले दान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
90 एकड़ बेशकीमती जमीन
बाबा महाकाल की अन्य संपत्तियों की बात करें तो उनके नाम पर लगभग 90 एकड़ बेशकीमती जमीन है। इसके अलावा लगभग 16 करोड़ रुपये की नकद राशि भी विभिन्न बैंकों में जमा है। उल्लेखनीय है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालु ऑनलाइन, नकद, सोना-चांदी तथा अन्य माध्यमों से भी दान करते हैं।
लड्डू प्रसाद से भी बढ़ी आय
महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाले दान के साथ-साथ यहां तैयार की जाने वाली लड्डू प्रसादी से भी मंदिर समिति को अच्छी आय हो रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल की लड्डू प्रसादी खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं। यही कारण है कि मंदिर की आय बढ़ाने में लड्डू प्रसादी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
इस वर्ष 142 करोड़ रुपये की आय
एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक महाकालेश्वर मंदिर की कुल आय 142 करोड़ रुपये रही। वहीं, वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा लगभग107 करोड़ रुपये था। मंदिर की आय बढ़ने के साथ-साथ उसके खर्चों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बताया जाता है कि पहले कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण मासिक खर्च भी कम था, लेकिन अब मंदिर की व्यवस्थाओं पर लगभग 11 करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च किए जा रहे हैं।
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