
मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में एक बार फिर अंदरूनी विवाद सामने आया है। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और NCP अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष पद का चुनाव तय प्रक्रिया के अनुसार नहीं कराया गया और इसे दोबारा कराया जाना चाहिए। यह विवाद अजित पवार के निधन के करीब छह महीने बाद सामने आया है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कानूनी नोटिस के जरिए चुनाव को चुनौती
NCP के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी है। दिल्ली की विधि फर्म एआरएस एसोसिएट्स के माध्यम से नौ जुलाई को जारी कानूनी नोटिस में उन्होंने 26 फरवरी को हुए अध्यक्ष पद के चुनाव को असंवैधानिक बताते हुए इसे अमान्य घोषित करने की मांग की है। यह नोटिस सुनेत्रा पवार, NCP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है।
चुनाव प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी संविधान के जरूरी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। दावा किया गया है कि पार्टी के प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया की उचित जानकारी नहीं दी गई।
नोटिस के अनुसार, अजित पवार के 28 जनवरी को निधन के बाद पार्टी ने निर्वाचन आयोग को जानकारी दी थी कि नए अध्यक्ष के चुनाव तक प्रफुल्ल पटेल कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे।
सच्चिदानंद सिंह ने आरोप लगाया है कि बृजमोहन श्रीवास्तव ने बिना संवैधानिक अधिकार के राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया और चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी।
‘न चुनाव प्राधिकरण बना, न चुनाव कार्यक्रम घोषित हुआ’
कानूनी नोटिस में दावा किया गया है कि पार्टी संविधान के अनुसार न तो केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन किया गया, न ही निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया और न ही चुनाव कार्यक्रम जारी किया गया। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रतिनिधियों को उम्मीदवारों का नामांकन करने, चुनाव लड़ने या मतदान करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
चुनाव आयोग से पुराने पत्र वापस लेने की मांग
सच्चिदानंद सिंह ने निर्वाचन आयोग को भेजे गए 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल के उन पत्रों को वापस लेने की मांग की है, जिनमें चुनाव और पदाधिकारियों से जुड़ी जानकारी दी गई थी। उन्होंने स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की निगरानी में नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग भी रखी है। नोटिस में पार्टी नेतृत्व को मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। ऐसा नहीं होने पर आगे कानूनी कदम उठाने की बात कही गई है।
NCP ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, NCP प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सच्चिदानंद सिंह 26 फरवरी को हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में मौजूद थे और उन्होंने हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के पक्ष में मतदान किया था। चव्हाण ने दावा किया कि अध्यक्ष पद का चुनाव पूरी प्रक्रिया और नियमों के अनुसार हुआ था।
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