
इंदौर। शासन की रोक के बावजूद इंदौर में धारा 16 का जो बड़ा खेला कलेक्टर कार्यालय की कॉलोनी सेल द्वारा खेला गया, उसका भोपाल तक हल्ला मच गया। वल्लभ भवन से लेकर नगर तथा ग्राम निवेश के आला अफसर भी भौंचक रह गए कि किस तरह 44 एकड़ की 4 कॉलोनियों के प्रोजेक्टों को मंजूरी दे डाली। हाईकोर्ट के जिस आदेश के हवाले से ये विकास अनुज्ञाएं जारी की गईं उस बारे में डबल बेंच में अपील करने या शासन से मार्गदर्शन लेने की भी जरूरत स्थानीय अधिकारियों ने नहीं समझी और मनमानी व्याख्या करते हुए निवेश क्षेत्र में शामिल इन जमीनों पर कॉलोनियां मंजूर कर डाली। इसी तरह के प्रकरण जहां हाईकोर्ट में प्रस्तुत होंगे, वहीं कॉलोनी सेल के पास भी ऐसे आवेदनों की भरमार हो जाएगी।
मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सख्ती के साथ 20 माह पूर्व धारा 16 में हो रही अनुमतियों को तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया था। 12 अक्टूबर 2024 को धारा 16 के लिए बनाई गई शासन की कमेटी की अंतिम बैठक भोपाल में हुई थी, जिसमें 700 एकड़ से अधिक जमीनों पर अनुमतियां दी गईं और उसी के मचे हल्ले के चलते मुख्य सचिव ने पूरी तरह से रोक लगवा दी। नतीजतन 20 माह से धारा 16 में एक भी अनुमति नहीं हुई। मगर 9 दिसम्बर 2025 में हुए हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने एसआर रियलिटीज की पीटीशन पर कहा कि 30 दिन में कानून के अनुरूप अनुमति दी जाए। यानी हाईकोर्ट की भी स्पष्ट मंशा रही कि अनुमति कानून सम्मत है, तो दी जाए। इस आदेश को 6 माह तक दबाए रखा और पिछले दिनों कॉलोनी सेल के अधिकारियों पर वरिष्ठों ने दबाव डाला और सांवेर तहसील के मुरादपुरा गांव की 17 हेक्टेयर यानी 44 एकड़ जमीन पर गुरुकृपा के 4 फेज के प्रोजेक्टों को विकास अनुज्ञाएं दे डाली। कल अग्निबाण ने इसका खुलासा किया, उसके बाद कॉलोनी सेल में तो हडक़म्प मचा ही, वल्लभ भवन में बैठे आला अधिकारी भी भौंचक रह गए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह की अनुमति नहीं दी जाना चाहिए थी। संचालक नगर तथा ग्राम निवेश कौशलेन्द्र विक्रम सिंह से जब अग्निबाण ने पूछा तो उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी उन तक कल पहुंची है और उन्होंने इंदौर कलेक्टर से इसकी रिपोर्ट मांगी भी है, वहीं नगर तथा ग्राम निवेश के ही अन्य अफसरों का कहना है कि शासन ने धारा 16 का जो आदेश जारी किया उसमें स्पष्ट लिखा है कि अगर पूर्व से अभिमत भी है तो भी बिना संचालक की मंजूरी के धारा 16 में किसी तरह की अनुमति जारी करने का अधिकार किसी को भी नहीं है। यहां तक कि पूर्व कलेक्टर और वर्तमान उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह का भी कहना है कि उन्होंने शासन को पत्र भेजकर इस संबंध में मार्गदर्शन भी मांगा और कोई भी प्रकरण इसीलिए मंजूर भी नहीं किया। दूसरी तरफ कलेक्टर शिवम वर्मा से जब इस मामले में प्रतिक्रिया चाही गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अलबत्ता कॉलोनी सेल में कल दिनभर हडक़म्प मचा रहा और शासन स्तर से होने वाली पूछताछ का जवाब बनाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस बारे में शासन को पत्र लिखने और एजी ऑफिस से विधिक अभिमत भी लिया गया था। हालांकि इन सबके बावजूद प्रशासन को इस आदेश के खिलाफ डबल बेंच में अपील करने के साथ शासन से लिखित में निर्देश हासिल करना चाहिए थे।
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