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फीता कटेगा, इलाज नहीं मिलेगा, जिला अस्पताल मरीजों के लिए तैयार नहीं

July 14, 2026

  • 17 जुलाई को उद्घाटन तय, लेकिन पानी, फर्नीचर, उपकरण, सफाई और सुरक्षा तक अधूरी, जल्दबाजी में होगा शुभारंभ, इलाज शुरू होने में अभी लगेगा वक्त

इंदौर। धार रोड स्थित 300 बिस्तरीय जिला अस्पताल का 17 जुलाई को उद्घाटन होगा, लेकिन अस्पताल के मौजूदा हालात देखकर साफ नजर आ रहा है कि यह आयोजन सिर्फ सरकारी औपचारिकता बनकर रह जाएगा, क्योंकि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के इलाज की शुरुआत संभव नहीं दिख रही, क्योंकि मरीजों के इलाज में उपयोग होने वाले उपकरण, फर्नीचर और मूलभूत सुविधाएं अब भी नदारद हैं। सबसे गंभीर स्थिति पानी, सफाई और सुरक्षा की है। अस्पताल आज भी पीने के पानी के लिए बाहर से आने वाले कैंपरों पर निर्भर है। गर्मियों में यहां टैंकर तक बुलाने पड़े थे।

जब 10 बेड वाले अस्पताल की व्यवस्था ही पानी के संकट से जूझ रही थी तो अब लगभग 100 बेड शुरू होने पर हालात कैसे संभलेंगे। परिसर में गंदगी, बदबू और पान-गुटखे की पीक साफ बता रही है कि भवन तो तैयार हो गया, लेकिन अस्पताल अभी नहीं। सालों से अटके अस्पताल का उद्घाटन सरकार जल्द से जल्द करना चाहती है, लेकिन जिला अस्पताल में पानी, फर्नीचर, उपकरण, सफाई और सुरक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं ही पूरी नहीं हैं। गर्भवती माता और बच्चों को अभी और 20 से 25 दिन इलाज नहीं मिल सकेगा। ऑपरेशन थिएटर को डिसइन्फेक्शन करने में ही लगभग 8 दिन का समय लगेगा। वहीं बच्चों के एनआईसीयू और कंगारू मदर वार्ड में भी डिसइन्फेक्शन चुनौती है।

पानी की सबसे बड़ी परेशानी

जिला अस्पताल में पीने के पानी की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। दोपहर तक सामाजिक संस्था के कैंपरों से पानी मिलता है, उसके बाद मरीज और परिजन परेशान होते हैं। अस्पताल में 10 वाटर प्यूरिफायर लगाने की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अब तक एक भी चालू नहीं हुआ। इस बार गर्मियों में टैंकर बुलाने पड़े थे।

तीन दिन… और काम अब भी अधूरा

अस्पताल के कई हिस्सों में अभी भी फिनिशिंग का काम जारी है। कहीं फ्लोर पॉलिश हो रही है तो कहीं मरम्मत चल रही है। वार्ड तैयार हैं, लेकिन उनमें फर्नीचर नहीं है। ओटी, वार्ड और अन्य इकाइयों के संचालन के लिए जरूरी संसाधन अब तक पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।

घूम रहे कुत्ते

जिस अस्पताल में नवजात शिशुओं और प्रसूताओं का इलाज होना है। वहां डिलेवरी पॉइंट और सीटी स्कैन यूनिट तक आवारा कुत्ते घूमते दिखाई दे रहे हैं। इससे सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण की तैयारियों की पोल खुल रही है। पहले 10 बिस्तरों पर सेवाएं चल रही थीं, लेकिन अब लगभग 100 बिस्तरों की व्यवस्था के बावजूद सुरक्षा इंतजाम अधूरे हैं।

अस्पताल खुद ही बीमार…

नई इमारत शुरू होने से पहले ही बदहाल नजर आने लगी है। अस्पताल परिसर और शौचालयों में बदबू फैली है। कई जगह पान-गुटखे की पीक दीवारों और फर्श पर दिखाई दे रही है। डिलेवरी पॉइंट के पास पुराने बेड और कबाड़ पड़ा है। संक्रमण की चुनौती उद्घाटन से पहले ही सामने खड़ी है।

तीन दिन में चमत्कार कैसे होगा?

स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि तीन दिन में सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। स्वास्थ्य आयुक्त एस. धनराजू ने स्थानीय स्तर पर संसाधन तुरंत जुटाने और बाकी सामग्री भोपाल से मंगाने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि 18 जुलाई से नई मेटरनिटी विंग शुरू कर दी जाएगी।

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