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उज्जैन। शहर में ई व्हीकल खरीदने को लेकर लोगों की रुचि अभी भी सामान्य बनी हुई हैं, वहीं जिन्होंने ई बाइकें और कार खरीदी हैं वे भी अब पछता रहे हैं। सर्विस सेंटरों पर खराब ई वाहनों की लगी लाइन इसका एक मात्र उदाहरण हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा भले ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है लेकिन अभी कुछ बाधाएं हैं जिसके चलते इस मार्केट को अपेक्षा के अनुरूप गति नहीं मिल रही है, वहीं इलेक्ट्रिक गाडिय़ों को बड़े पैमाने पर अपनाने में कीमत, यानी अफोर्डेबिलिटी, आज भी सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। पिछले कुछ सालों में चार्जिंग सुविधाएँ जरूर बेहतर हुई हैं, लेकिन चार्जिंग की उपलब्धता, बैटरी की लाइफ, रीसेल वैल्यू और गाड़ी रखने के समग्र अनुभव जैसी चिंताएं अभी भी ग्राहकों के फैसले को प्रभावित करती हैं। यहीं कारण है कि उज्जैन में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार प्रदेश के अन्य बड़े शहरों की तुलना में काफी धीमी है। वहीं बीते तीन सालों में केवल 15 हजार वाहन ही सड़कों पर आए हैं। इसमें से आधे सर्विस सेंटरों पर खड़े हैं। यानी ई व्हीकल को लेकर सबसे बड़ी चिंता सर्विस की है। ग्राहकों की शिकायत है कि सर्विस सेंटर हमेशा व्यस्त रहते हैं और मामूली मरम्मत के लिए भी महीनों ई वाहन सेंटरों के पास छोडऩा पड़ते है। अग्निबाण की पड़ताल में फ्रीगंज स्थित ई बाइक के ओला शोरूम पर यही हाल देखने को मिले। एक ग्राहक ने बताया कि मैंने ईंधन की बचत को ध्यान में रखते हुए कुछ माह पहले ई बाइक खरीदी थी, लेकिन ई बाइक की जितनी सुविधा है उतनी परेशानी भी। ई बाइक में सबसे बड़ी परेशानी सर्विस सेंटर की है। इसके आसानी से मैकेनिक नहीं मिलते हैं। इसके अलावा भी इसमें कई खामियां हैं। ये स्थिति ग्राहक को आर्थिक फायदा नहीं नुकसान पहुंचा रही है।
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