
नितिन गौतम, सिहोरा। क्या कोई पूरी की पूरी पहाड़ी गायब कर सकता है? सुनने में यह नामुमकिन लगता है, लेकिन सिहोरा में हरगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया के आगे घूघरा ग्राम के समीप में रोड पर ही एक मंदिर है उसके समीप ही पहाड़ी थी जो अब गायब हो चुकी है और साथ में सैकड़ों पेड़ों का कत्ल कर दिया गया। ये सब अवैध खनिज माफियाओं ने कर दिखाया। यहाँ पर्यावरण संरक्षण के सरकारी दावों को ठेंगा दिखाते हुए माफिया ने एक सुंदर, ऐतिहासिक और हरी-भरी छोटी पहाड़ी का वजूद ही मिटा दिया। चंद रुपयों के लालच में इस पूरी पहाड़ी को खोदकर एक खौफनाक खदान में बदल दिया गया है।
हरे-भरे पेड़ों पर चली माफिया की कुल्हाड़ी-
यह सिर्फ पत्थरों या मिट्टी की चोरी नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की हत्या है। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, इस पहाड़ी पर सैकड़ों कीमती और पुराने पेड़ हुआ करते थे, जो इस पूरे इलाके को ऑक्सीजन और हरियाली देते थे। माफिया ने भारी मशीनों (जेसीबी और पोकलेन) के दम पर उन सैकड़ों पेड़ों को जड़ से उखाड़कर गायब कर दिया। आज वहाँ हरियाली की जगह सिर्फ कटी-फटी लाल मिट्टी और तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है।
छोड़ दिए मौत के कुएं, मंडरा रहा है खतरा
माफिया ने पहाड़ी को इस कदर खोखला कर दिया है कि अब वह जगह एक गहरे और खतरनाक मौत के कुएं में तब्दील हो चुकी है। भारी बारिश में इन गड्ढों में पानी भरने से स्थानीय ग्रामीणों, बच्चों और मवेशियों के डूबने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। बिना किसी सुरक्षा घेरे के छोड़ी गई यह खदान किसी भी दिन बड़े हादसे को दावत दे सकती है।
प्रशासनिक शह या अंधा कानून?
हैरानी की बात यह है कि महीनों तक चले इस अवैध उत्खनन और सैकड़ों पेड़ों की कटाई के दौरान स्थानीय प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की आंखें बंद रहीं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बिना प्रशासनिक सांठगांठ और संरक्षण के इतनी बड़ी पहाड़ी को इस तरह गायब करना मुमकिन ही नहीं है।
दोषियों पर होगी एफआईआर
यह मामला सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन और पर्यावरण से खिलवाड़ है। मौके का मुआयना कर अवैध खनन करने वालों और पेड़ों को काटने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ज्योति परस्ते , एसडीएम, सिहोरा
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