
जबलपुर। गढ़ा क्षेत्र का चौहानी मुक्तिधाम शहर का प्रमुख अंतिम संस्कार स्थल है, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। मानसून की पहली बारिश के साथ ही यहाँ की अव्यवस्थाएं खुलकर सामने आ गई हैं। मुक्तिधाम के अधिकांश शेड क्षतिग्रस्त होकर टूट चुके हैं और कई स्थान पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शोकाकुल परिजनों को बैठने तक की उचित जगह नसीब नहीं हो रही है। इस मुख्य स्थल पर न तो पीने के पानी की कोई व्यवस्था है और न ही धूप-बारिश से बचने के लिए पर्याप्त शेड। परिजनों को मजबूरी में बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा है। महापौर और नगर निगम प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि यह स्थल शहर की अंतिम विदाई का साक्षी बनता है।
पानी के लिए भी तरसते हैं शोकाकुल परिजन
मुक्तिधाम जैसी संवेदनशील जगह पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव होना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। यहाँ आने वाले लोगों को पीने के साफ पानी तक के लिए संघर्ष करना पड़ता है। पीने का पानी उपलब्ध न होने के कारण लोग बाजार से पानी की बोतल या पाउच मंगाने को मजबूर हैं। यह केवल बुनियादी ढांचे की कमी नहीं, बल्कि संवेदनाओं का भी अभाव है। यदि अधिकारी और महापौर एक बार खुद मौके पर आकर व्यवस्थाओं का अवलोकन करें, तो उन्हें समझ आएगा कि मरघट की शांति में भी कितनी बड़ी पीड़ा छिपी है। हालांकि नगर निगम के बजट में शमशान के रखरखाव की राशि का उल्लेश जरूर रहता है, लेकिन स्थिति सबके सामने है। आमजन की मांग है कि तत्काल प्रभाव से शेडों की मरम्मत की जाए और परिसर में पेयजल तथा बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि अंतिम विदाई का सफर सम्मानजनक तरीके से पूरा हो सके।
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