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भारत का बड़ा फैसला! अब इन विदेशी सामानों की नहीं होगी एंट्री

July 16, 2026

नई दिल्ली: भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति 2023 में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार ऐसा कानूनी प्रावधान जोड़ा है, जिसके तहत जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने सामान के आयात पर रोक लगाई जा सकेगी. यह कदम भारत की व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है. इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा, पारदर्शी सप्लाई चेन और जिम्मेदार व्यापार (Responsible Trade) को बढ़ावा देना है.

DGFT को मिला जांच और कार्रवाई का अधिकार
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की नई अधिसूचना के तहत FTP में पैरा 2.20B जोड़ा गया है. इसके अनुसार, यदि किसी उत्पाद के निर्माण में पूरी तरह या आंशिक रूप से जबरन मजदूरी का इस्तेमाल होने के प्रमाण मिलते हैं, तो केंद्र सरकार जांच के आधार पर उस उत्पाद को अधिसूचित कर उसके आयात पर प्रतिबंध लगा सकती है. इस मामले में जांच की जिम्मेदारी DGFT की होगी और पूरी प्रक्रिया Handbook of Procedures में तय नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी.

पहली बार दी गई Forced Labour की स्पष्ट परिभाषा
नई अधिसूचना में पहली बार Forced Labour की आधिकारिक परिभाषा भी शामिल की गई है. FTP के नए पैरा 11.64 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के Forced Labour Convention, 1930 (Convention No. 29) का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के खिलाफ, डर, धमकी या किसी दंड के दबाव में कराया गया काम जबरन मजदूरी माना जाएगा.इस बदलाव से भविष्य में ऐसे मामलों की पहचान और जांच के लिए स्पष्ट कानूनी आधार उपलब्ध होगा.


  • किसी देश या कंपनी का नाम नहीं
    सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में किसी भी देश, कंपनी या उत्पाद का नाम नहीं लिया गया है. यानी यह नियम किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए नहीं बनाया गया है. भविष्य में अगर किसी भी देश से आने वाले किसी उत्पाद के निर्माण में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल साबित होता है, तो उसके आयात पर रोक लगाई जा सकेगी.

    हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चा चीन के शिनजियांग (Xinjiang) क्षेत्र में बने कुछ उत्पादों को लेकर होती रही है. अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेषज्ञों और कई मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाए हैं कि वहां उइगर मुस्लिम समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों से जबरन मजदूरी कराई जाती है. चीन इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है.

    अमेरिका और यूरोप पहले ही बना चुके हैं सख्त नियम
    दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं पहले ही Forced Labour से बने उत्पादों पर सख्त रुख अपना चुकी हैं.अमेरिका ने Uyghur Forced Labor Prevention Act (UFLPA) लागू कर शिनजियांग से जुड़े उत्पादों के आयात पर कड़े नियम लागू किए हैं. वहीं यूरोपीय संघ (EU) ने भी ऐसे उत्पादों को अपने बाजार से बाहर रखने के लिए नया नियामकीय ढांचा तैयार किया है. कनाडा सहित कई विकसित देशों ने भी सप्लाई चेन में मानवाधिकारों के पालन को लेकर सख्त नियम बनाए हैं.

    भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
    भारत ऐसे समय यह कदम उठा रहा है, जब वह खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. साथ ही यूरोप, ब्रिटेन और अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर भी तेजी से काम चल रहा है. आज वैश्विक कारोबार में सिर्फ सस्ती कीमत और बेहतर गुणवत्ता ही मायने नहीं रखती, बल्कि सप्लाई चेन की पारदर्शिता, पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) मानक तथा मानवाधिकारों का पालन भी व्यापार का अहम हिस्सा बन चुके हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ विदेशी व्यापार नीति में संशोधन नहीं, बल्कि यह संकेत है कि भारत भी वैश्विक व्यापार में Ethical Trade और Responsible Supply Chain के मानकों को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

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