
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा ने पाकिस्तान की केंद्र सरकार से एक खास मांग की है। इस नई मांग से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दरअसल, विधानसभा ने इस पहाड़ी क्षेत्र को अस्थायी प्रांत का दर्जा देने के लिए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास किया है। इस प्रस्ताव में क्षेत्र के लोगों को संवैधानिक और राजनीतिक अधिकार देने की मांग की गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को विधानसभा सत्र में विधायक जलाल अली शाह ने यह प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने अपना पूरा समर्थन दिया।
प्रस्ताव में कहा गया है कि साल 2009 के ‘गिलगित-बाल्टिस्तान सशक्तिकरण और स्वशासन आदेश’ ने यहां एक चुनी हुई विधानसभा बनाई थी। इससे स्वशासन को बढ़ावा मिला था। इसके बाद, साल 2018 के आदेश ने विधानसभा को कानून बनाने के अधिकार दिए। यह फैसला दिवंगत नेता सरताज अजीज की अध्यक्षता वाली कमेटी की सिफारिशों पर लिया गया था। अब विधानसभा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस कमेटी की सिफारिशों को लागू करे। इससे यहां के लोगों को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अपने प्रतिनिधि चुनने और संघीय स्तर पर प्रतिनिधित्व पाने का मौका मिलेगा।
दूसरी तरफ, भारत इस मामले पर हमेशा से अपना रुख साफ रखता आया है। भारत का कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर सहित पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। नई दिल्ली ने पाकिस्तान के इस क्षेत्र की स्थिति बदलने के प्रयासों को हमेशा खारिज किया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के ऐसे कदमों का कोई कानूनी आधार नहीं है और इससे जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved