
जिंद, हरियाणा । रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Railway Minister Ashwini Vaishnaw) ने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) आत्मनिर्भर भारत का शानदार उदाहरण है (Is magnificent example of an Atmanirbhar Bharat) ।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन, रेलवे को आधुनिक बनाने के पीएम मोदी के विजन का अहम हिस्सा है। इस ट्रेन की तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है और आत्मनिर्भर भारत का शानदार उदाहरण है। वैष्णव ने कहा कि भारत में हाइड्रोजन को दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह ही एक नए ईंधन के तौर पर देखा जाता है और सरकार ने इसे बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। रेलवे ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए 2,400 किलोवाट का पूरा हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम तैयार किया है, जिसे इस ट्रेन में लगाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि यह तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सोच को दर्शाती है। यह ग्रीन एनर्जी की दिशा में एक अहम कदम है। साथ ही, यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों से चल रहे रेलवे के आधुनिकीकरण के काम का हिस्सा है।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि इस हाइड्रोजन तकनीक के बौद्धिक संपदा (आईपी) अधिकार भारत के पास ही है और इसे आने वाले समय में निर्यात में भी किया जाएगा। साथ ही कहा कि रेलवे फिलहाल इसे आगे विकसित करने पर कार्य कर रहा है। रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, हाइड्रोजन फ्यूल सेल संचालित ट्रेन का प्रारंभिक संचालन उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत रेलखंड पर किया जाएगा। यह ट्रेन जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ेगी। साथ ही यह मार्ग के बीच स्थित स्टेशनों और प्रस्तावित ठहरावों पर भी सेवा देगी। इनमें जींद सिटी, पांडू पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हॉल्ट, भंभेवा, इसापुर खेड़ी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, खंडराई हॉल्ट, रभराह हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहाना, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत न्यू शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, भारत में चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत यह है कि इसे 10 कोचों वाले यात्री ट्रेनसेट के रूप में तैयार किया है, जिसमें करीब 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। वहीं, वर्तमान में दुनिया भर में संचालित अधिकांश हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों में केवल दो या तीन कोच होते हैं और इन्हें मुख्य रूप से छोटी क्षेत्रीय रेल सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved