
लुधियाना । नीट यूजी परीक्षा में (In NEET-UG Exam) लुधियाना के आर्यन गुप्ता (Ludhiana’s Aryan Gupta) ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया (Secured First Rank Nationwide) ।
आर्यन ने 720 में से 715 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 अपने नाम की है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा पंजाब गौरवान्वित महसूस कर रहा है। आर्यन गुप्ता एक ऐसे परिवार से आते हैं, जहां कई पीढ़ियों से लोग चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनके घर में डॉक्टर बनने का माहौल रहा है। उनके माता-पिता, नाना-नानी, मामा-मामी और बुआ-फूफा सभी डॉक्टर हैं। यही वजह रही कि उनके मन में भी डॉक्टर बनने की इच्छा बचपन से ही मजबूत होती गई। आर्यन ने अपनी सफलता का श्रेय लगातार मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को दिया। उन्होंने बताया कि दो साल की तैयारी के दौरान उन्होंने क्लास में पढ़ाए गए विषयों को गंभीरता से समझा और घर आकर नियमित रूप से होमवर्क और रिवीजन किया। उनका कहना है कि नीट जैसी परीक्षा में सफलता के लिए लगातार प्रयास और धैर्य सबसे जरूरी है।
आर्यन ने बताया कि परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव और दोबारा परीक्षा की स्थिति उनके लिए भी चुनौतीपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि जब दोबारा परीक्षा की घोषणा हुई तो शुरुआत में उन्हें झटका लगा, क्योंकि दो साल की मेहनत के बाद किताबें बंद कर दी थीं और फिर से पूरी तैयारी शुरू करनी पड़ी। हालांकि, उन्होंने इसे एक और अवसर के रूप में लिया और पहले से ज्यादा मेहनत की। उन्होंने बताया कि पहली परीक्षा में उनके 696 अंक आए थे, जबकि दोबारा हुई परीक्षा में उन्होंने 715 अंक हासिल किए। आर्यन के अनुसार, दूसरी परीक्षा पहले से ज्यादा कठिन थी, लेकिन उन्हें विश्वास था कि मेहनत का परिणाम जरूर मिलेगा। उन्होंने अपनी सफलता में ईश्वर की कृपा और किस्मत को भी महत्वपूर्ण बताया। आर्यन ने अपनी सफलता में अपने बड़े भाई आदित्य गुप्ता की भूमिका को सबसे खास बताया। उन्होंने कहा कि उनके बड़े भाई ने नीट की तैयारी के दौरान उन्हें सही दिशा दिखाई और परीक्षा की रणनीति समझाने में काफी मदद की। आर्यन के लिए उनके भाई पिछले दो सालों में प्रेरणा और रोल मॉडल रहे।
आर्यन की मां रेनू गुप्ता ने बेटे की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके बच्चे शुरू से ही पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि परिवार में शिक्षा और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया है। आर्यन के बड़े भाई ने भी स्कूल स्तर पर शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं और अब छोटे बेटे ने नीट में देशभर में पहला स्थान हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया है। रेनू गुप्ता ने बताया कि उनका अस्पताल और घर एक ही जगह होने के कारण बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों को संभालना आसान रहा। उन्होंने कहा कि जब बच्चा खुद मेहनत करने के लिए तैयार हो तो माता-पिता का काम उसे सही समर्थन और माहौल देना होता है। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि उनका बच्चा खुश और स्वस्थ रहे।
आर्यन के पिता सचिन गुप्ता ने कहा कि 23 लाख छात्रों में से उनके बेटे का पहला स्थान हासिल करना उनके लिए बेहद गर्व और खुशी का क्षण है। उन्होंने कहा कि बच्चों पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया गया, बल्कि उन्हें अपनी रुचि के अनुसार करियर चुनने की आजादी दी गई। सचिन गुप्ता ने बताया कि आर्यन गणित में भी अच्छे थे और उनके पास दूसरे विकल्प भी थे, लेकिन उन्होंने खुद डॉक्टर बनने का फैसला किया। परिवार ने सिर्फ उन्हें दिशा और सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि आर्यन पढ़ाई के साथ सामान्य जीवन भी जीते थे। वह दोस्तों से मिलते थे, खेलते थे और कभी-कभी परिवार के साथ बाहर खाना खाने भी जाते थे, लेकिन जब पढ़ाई का समय होता था तो वह पूरी एकाग्रता के साथ मेहनत करते थे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से परिवार धार्मिक यात्राओं पर नहीं जा पाया था क्योंकि पूरा ध्यान आर्यन की तैयारी पर था। अब सफलता मिलने के बाद वे मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद और धन्यवाद देना चाहते हैं।
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