
जबलपुर। मध्य प्रदेश सिविल सप्लाईज कारपोरेशन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि टीकमगढ़ भेजे गए खराब चावल का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि अब मझौली स्थित ओम साई वेयरहाउस से बैतूल जिले के लिए भेजी गई 54 हजार बोरी गेहूं की गुणवत्ता पर भारी आपत्तियां सामने आ गई हैं। जानकारों के अनुसार इस पूरे परिवहन पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च हुए जबकि इससे पहले टीकमगढ़ भेजे गए चावल के परिवहन पर करीब 35 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया गया था जिससे साफ है कि सरकारी धन का किस तरह दुरुपयोग किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि सर्वेक्षक की रिपोर्ट में इस गेहूं में घुन मिट्टी और कीट मिलने का स्पष्ट उल्लेख किया गया है जिससे करोड़ों रुपये के सरकारी अनाज और लाखों रुपये के परिवहन खर्च को लेकर अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही जगजाहिर हो रही है। इस मामले में जब कारपोरेशन की एक प्रभारी महिला अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने केवल इतना ही स्वीकार किया कि बैतूल जिले को गेहूं भेजने की जानकारी दी गई है और कुछ शिकायतें सामने आई हैं लेकिन इसके बाद उन्होंने कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया जिससे दाल में कुछ काला होने का संदेह और अधिक गहरा गया है।
गेहूं के बाद चावल घोटाले में फंसे अधिकारी
मध्य प्रदेश सिविल सप्लाईज कारपोरेशन के अंतर्गत हो रहे खेल का दायरा केवल गेहूं तक ही सीमित नहीं है बल्कि चावल और धान के मामलों में भी बड़े पैमाने पर गड़बडिय़ां सामने आ रही हैं। जबलपुर जिले से वर्ष 2024 में शहपुरा वेयर हाउस से एक रैक के माध्यम से करीब 26 हजार क्विंटल चावल टीकमगढ़ जिले के लिए भेजा गया था जिसमें से लगभग 18 हजार क्विंटल चावल पूरी तरह अमानक पाया गया। इस गंभीर गड़बड़ी पर टीकमगढ़ के एसडीएम ने आधिकारिक रूप से आपत्ति जताई थी लेकिन इसके बावजूद वर्तमान जिला प्रबंधक संजय सिंह ने नियमों को ताक पर रखकर मिलिंग का पूरा बिल पास कर दिया। इसके अलावा धान की जगह चावल जमा नहीं कराने का मामला भी सामने आया है जहां आयुष ट्रेडर्स और ऋषि ट्रेडर्स मिलर को धान के बदले चावल देना था लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी आज तारीख तक उनके द्वारा चावल वापस नहीं किया गया जबकि नियमानुसार मिलर को केवल 40 दिनों के भीतर चावल वापस करना अनिवार्य होता है।
बरसों से सड़ रहा है सरकारी अनाज का विशाल जखीरा
घोटालों और लापरवाही का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकता क्योंकि जिले से 30 किलोमीटर दूर धनपुरी स्थित बीजापुरी कैप में लगभग 5928 क्विंटल गेहूं वर्ष 2018 19 से खुले में रखा हुआ है और सूत्रों के अनुसार इनमें से आधे से अधिक गेहूं पूरी तरह खराब हो चुका है। स्थिति यह है कि 26 मई माह में इस क्षतिग्रस्त गेहूं की निविदा सूची तैयार की गई थी लेकिन इसके बावजूद जिला प्रबंधक ने उसे उस सूची में दर्ज ही नहीं कराया जिससे स्पष्ट होता है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों कोरोड़ों का संरक्षण प्राप्त है। यदि समय रहते इन सभी मामलों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई तो मध्य प्रदेश सिविल सप्लाईज कारपोरेशन के इन काले कारनामों से प्रदेश की जनता का व्यवस्था से पूरी तरह विश्वास उठ जाएगा और सरकारी गोदामों में सड़ रहा यह अनाज प्रशासनिक भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी दास्तां बन जाएगा।
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