
इंदौर। कल रवीन्द्र नाट्यगृह (Rabindra Natyagriha) में छात्रों (Students) के संवेदनशील मुद्दे पर भी कांग्रेस (Congress) के नेताओं (Politicians) ने नेतागीरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जैसे ही प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी वहां आए पार्षद पति के समर्थकों ने नारेबाजी कर दी, जिससे हॉल के अंदर बैठे लोगों को लगा कि बाहर कोई विवाद हो गया है और वे बाहर जाने लगे, लेकिन आयोजकों ने उन्हें अपने स्थान पर बिठाया। कार्यक्रम में भी कई बार ढीलपोल होती रही, जिसके कारण छात्रों को जिस मकसद से लाया गया था, वह भी पूरा नहीं हो पाया। और तो और पटवारी वहां से जैसे ही निकले आधे से ज्यादा हाल खाली हो गया, जबकि कार्यक्रम खत्म ही नहीं हुआ था।
छात्रों की गंूज कार्यक्रम के तहत कल फेडरेशन ऑफ वल्र्ड यूथ एसोसिएशन ने रवीन्द नाट्यगृह में कांग्रेस नेताओं का विद्यार्थियों से संवाद कार्यक्रम रखा गया था, जिसकी अगुवाई शुक्ला परिवार की शाम्भवी शुक्ला द्वारा की गई। हालांकि कार्यक्रम की जो गरिमा बनना थी, वह लचर संचालन और पहली बार इतना बड़ा कार्यक्रम कर रहे यूथ के बस की नहीं थी। फिर भी कार्यक्रम को भव्य रूप प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के बतौर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री प्रियव्रतसिंह को बुलाया गया था, जिन्हें युवाओं के सवालों के जवाब देना थे, लेकिन ये सभी सवाल एक एंकर द्वारा पूछे गए। पटवारी को लेने जब प्रियव्रतसिंह और शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे हॉल के बाहर थे तो बड़ी संख्या में युवाओं का एक धड़ा भी वहां बाहर खड़ा नजर आया। उनसे बार-बार अंदर बैठने को कहा गया, लेकिन वे नहीं माने। बाद में जैसे ही पटवारी पहुंचे कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने पटवारी जिंदाबाद के साथ अमित पटेल जिंदाबाद के नारे लगाए। दरअसल पटेल पार्षद यशस्वी पटेल के पति हैं और कांग्रेस में अपना प्रभाव बताने के लिए उनके समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी कर दी। इससे कार्यक्रम की गरिमा तार-तार होती नजर आई। अंदर भी कई बार कार्यकर्ता नारेबाजी करते रहे। हालांकि नारेबाजी का मकसद कांग्रेस के नेताओं को भी समझ नहीं आया। कार्यक्रम की शुरुआत जैसे-तैसे हुई तो करीब सवा घंटे तक स्वागत-सत्कार और औपचारिकताओं का दौर चलता रहा। बाद में मालूम चला कि यूथ से संवाद होना है। इसके लिए पटवारी और प्रियव्रत को मंच पर बुलाया गया। हालांकि 4-5 सवाल ही हुए थे कि पटवारी मंच से खड़े हो गए और कहा कि उन्हें दतिया जाने के लिए ट्रेन पकडऩा है, इसलिए वे कार्यक्रम से जा रहे हैं। पटवारी के बाहर निकलते ही आधे से ज्यादा हॉल खाली हो गया और युवा भी वहां से उठकर जाने लगे, जबकि बातचीत का दौर पूरा भी नहीं हुआ था। यह देख आयोजकों ने कार्यक्रम को सिमटा दिया और जल्द ही उसकी औपचारिकता समाप्ति कर दी। हालांकि इस दौरान न तो दिल्ली में धरने पर बैठे विद्यार्थियों के बारे में चर्चा हुई और न ही इंदौर के धरने का जिक्र हुआ।
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