
नई दिल्ली: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कल बुधवार को नए बने ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ (AOR) से कहा कि वे सोशल मीडिया पर दिखने की जगह अपने-अपने काम की क्वालिटी से अपना करियर संवारें. साथ ही उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि लंबे समय तक चलने वाली विश्वसनीयता कोर्ट रूम के अंदर तैयारी, नैतिकता और कड़ी मेहनत से बनती है. दिखना और विश्वसनीयता एक ही चीज नहीं होती.
साल 2025 बैच के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के सम्मान समारोह में बोलते हुए, CJI ने नए वकीलों को बधाई दी और कहा कि वे एक ऐसे समुदाय में शामिल हो रहे हैं जिसने दशकों से सुप्रीम कोर्ट को वकालत और न्याय प्रशासन की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखने में मदद की है.
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन से अर्हता हासिल करने वाले नए एओआर के लिए आयोजित सम्मान समारोह में CJI सूर्यकांत ने नए AOR से कहा कि हालांकि उनकी क्वालीफिकेशन ने इस प्रोफेशन में आने का दरवाजा तो खोल दिया है, लेकिन इससे उनका करियर नहीं बनेगा. उन्होंने कहा, “टाइटल दरवाजा तो खोल सकते हैं, लेकिन वे किसी का करियर नहीं बनाते. करियर आपके काम की क्वालिटी की वजह से बनता है.”
उन्होंने कहा कि किसी भी वकील का लक्ष्य यह होना चाहिए कि जब भी किसी केस फाइल में उनका नाम आए, तो उनकी पहचान पूरी तैयारी के साथ काम करने वाले वकील के तौर पर हो. उन्होंने युवा वकीलों को ऑनलाइन लोकप्रियता को पेशेवर सफलता समझने की गलती न करने की सलाह भी दी.
सोशल मीडिया पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने से बचने की सलाह देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “आजकल मैं देखता हूं कि लोगों का ध्यान खींचना और मशहूर होना बहुत आसान हो गया है. लोग सोशल मीडिया के जरिए ऐसा करने लगे हैं. लेकिन आप लोग यह याद रखें कि ऐसी लोकप्रियता और विश्वसनीयता एक जैसी चीजें नहीं हैं. हर किसी को अपनी कामयाबी को ऑनलाइन लोकप्रियता से मापने के लालच से बचना चाहिए. आपको किसी टीवी चैनल की तरह काम नहीं करना है जिसे अपनी TRP की चिंता सता रही हो.”
CJI सूर्यकांत ने कहा कि असली सम्मान वही होता है जो कोर्ट रूम के अंदर और दोस्तों, क्लाइंट्स और बार के सदस्यों से मिलता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि एक लंबा कानूनी करियर चैंबर में की गई कड़ी मेहनत से चलता है, न कि सोशल मीडिया के कमेंट सेक्शन से.
उन्होंने कहा, “असली सम्मान वह है जो आप कोर्ट रूम के अंदर और अपने साथियों, क्लाइंट्स और बार से कमाते हैं. दशकों तक चलने वाला कानूनी करियर गंभीर और बिना दिखावे वाली कड़ी मेहनत से ही टिका रहता है. ऐसी मेहनत जो चैंबर में की जाती है, न कि सोशल मीडिया के कमेंट सेक्शन में.”
CJI ने इस बात पर भी जोर दिया कि ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ बनना सिर्फ प्रोफेशनली तरक्की नहीं होता है, बल्कि जिम्मेदारी का दायरा बढ़ना भी है. उन्होंने नए AOR से यह भी अनुरोध किया कि वे जब भी संभव हो लीगल एड के केस स्वीकार करें और यह तय करें कि गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों को प्रतिनिधित्व से वंचित न रखा जाए.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved