
जांच की प्राथमिक रिपोर्ट सामने आई
– जिन कम्प्यूटर से घोटाला किया जाने का शक था उसका कोई रिकॉर्ड नहीं
– सिस्टम बायपास कर काम करने के रास्ते पकड़े
इंदौर, डा जितेन्द्र जाखेटिया ।
नगर निगम (municipal corporation) के बहुचर्चित नामांतरण घोटाले (Mutation scam) की साइबर जांच की प्राथमिक रिपोर्ट (Preliminary Report) आ गई है। इस रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि राज्य सरकार के ई-नगर पालिका पोर्टल (e-Municipality Portal) में 60 दिन से ज्यादा पुराना वर्किंग रिकॉर्ड नहीं है। नगर निगम को जिन कम्प्यूटर से इस घोटाले को अंजाम दिए जाने का शक था, उनके आईपी एड्रेस से यह शक अब हकीकत में नहीं बदल पा रहा है।
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल द्वारा इस चर्चित घोटाले की जांच के लिए तीन अपर आयुक्त की कमेटी गठित की गई थी। कमेटी में अपर आयुक्त आकाश सिंह, अर्थ जैन और दरवाई को लिया गया था। कमेटी द्वारा अभी जांच की जा रही है। कमेटी की जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है, लेकिन प्राथमिक जांच के अनुसार राज्य सरकार द्वारा मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के साइबर सिक्योरिटी के दो विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा पिछले तीन दिनों से नामांतरण घोटाले की जांच के बाद उसकी प्राथमिक रिपोर्ट कल उन्होंने सबमिट कर दी है। इस रिपोर्ट में उन्होंने इस बात का खुलासा किया है कि राज्य सरकार के ई-नगर पालिका पोर्टल में 90 दिन से ज्यादा का वर्किंग रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में जिस समय पर यह घोटाला हुआ था उस समय का भी ऐसा रिकॉर्ड नहीं है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि यह घोटाला करने वाली एंट्री कौन से कम्प्यूटर से की गई थी। सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिस पासवर्ड से लॉग इन और लॉग आउट किया गया वह चिह्नित है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कम्प्यूटर के आईपी एड्रेस जो इंदौर नगर निगम को मिले हैं वह पिन पॉइंट नहीं है। हर कम्प्यूटर में इंटरनल और एक्सटर्नल के रूप में दो आईपी एड्रेस होते हैं। यदि सिस्टम में फायर बॉल का लॉक है तो आईपी एड्रेस को ट्रैस किया जा सकता है। नगर निगम के सिस्टम में यह लॉक नहीं था, ऐसे में किसी भी सिस्टम को ट्रैस कर पाना संभव नहीं है। सूत्रों ने बताया कि इस प्राथमिक रिपोर्ट में बताया गया है कि ई-नगर पालिका पोर्टल में ओल्ड वर्किंग रिकॉर्ड के मौजूद नहीं होने के कारण इस घोटाले के सिस्टम का एक्यूरेट चिह्नांकन कर पाना संभव नहीं है। ध्यान रहे कि हर पोर्टल में 89 दिन या 120 दिन तक का ही वर्किंग रिकॉर्ड होता है। नगर निगम का यह घोटाला इस अवधि के पहले का है, ऐसे में पोर्टल के माध्यम से इसके दोषियों को ढूंढ पाना संभव नहीं है। सूत्रों के अनुसार इस विशेषज्ञ कमेटी द्वारा दी गई प्राइमरी रिपोर्ट के बाद अब इनसे विस्तृत रिपोर्ट भी जल्द देने के लिए कहा गया है।
दलालों के माध्यम से होता था घोटाला…
सूत्रों ने बताया कि इनमें से कुछ व्यक्तियों ने उन दलालों के नाम बताए हैं, जिनके माध्यम से यह काम कराया गया है। इसमें भी उन दलालों के मोबाइल नंबर या उनकी पहचान को स्थापित करने वाली कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। इसमें इन व्यक्तियों का कहना है कि हमें तो यह दलाल निगम के जोनल कार्यालय और मुख्यालय में मिले थे। निगम द्वारा किए गए 356 संपत्ति के नामांतरण में जो 51 संपत्ति बेच दी गईं उन संपत्ति को खरीदने वाले व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है। इन सभी 51 व्यक्तियों के नाम पर नोटिस जारी किए गए। इनमें से अभी तक करीब 30 व्यक्ति अपर आयुक्त के समक्ष आए हैं।
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