
नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल (West Bengal) सरकार ने नीट परीक्षा (NEET Exam) में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों (Students) को राहत देने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई (Punitive Action) नहीं की जाएगी। हालांकि जिन लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले (Criminal Cases) दर्ज हैं या जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि रही है, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
राज्य सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि केवल विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यह राहत केवल उन्हीं लोगों को मिलेगी जो शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल थे और जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किया जाएगा। जिन व्यक्तियों के खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है, वे इस राहत के दायरे में शामिल नहीं होंगे। ऐसे मामलों में पुलिस और जांच एजेंसियां कानून के अनुसार अपनी कार्रवाई जारी रखेंगी।
पश्चिम बंगाल सरकार ने बताया कि नीट परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं के संबंध में पुलिस की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में अब तक 16 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। सरकार के अनुसार मामले की जांच निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।
इससे पहले असम और बिहार की सरकारें भी नीट परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में राहत देने की घोषणा कर चुकी हैं। इन राज्यों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों और अन्य कानूनी कार्रवाइयों को वापस लेने की बात कही थी। पश्चिम बंगाल का ताजा फैसला भी इसी क्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गौरतलब है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को छात्र आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई थी। आंदोलन समाप्त होने से पहले सरकार और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी। इस दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने, भविष्य में अनावश्यक पुलिस कार्रवाई से बचने और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लाने जैसे मुद्दों पर सहमति बनी थी।
राज्य सरकार का कहना है कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को राहत देने के साथ-साथ उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का निर्णय लिया गया है जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं। सरकार का मानना है कि इससे कानून का पालन भी सुनिश्चित होगा और निर्दोष छात्रों के हितों की भी रक्षा की जा सकेगी।
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