
चंडीगढ़ । कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा (Congress MP Kumari Sailja) ने कहा कि कानून बना लेना ही पर्याप्त नहीं (Making Law is not Enough) उसका क्रियान्वयन भी जरूरी है (Its implementation is also Necessary) ।
पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की सफलता केवल नए-नए कानून बनाने से नहीं, बल्कि उन्हें ईमानदारी और प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू करने से तय होती है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के प्रभावी क्रियान्वयन में वर्षों की देरी पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब तलब किया जाना अत्यंत गंभीर विषय है। अदालत की यह टिप्पणी बताती है कि कानून बन जाने के बाद भी उसका वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुंच रहा। कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्ष 2017 में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम बनाया गया था, जिसका उद्देश्य मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें सम्मानजनक उपचार उपलब्ध कराना था। यदि उच्च न्यायालय को आठ वर्ष बाद भी सरकारों से यह पूछना पड़ रहा है कि कानून का पालन क्यों नहीं हुआ, तो यह केवल प्रशासनिक ढिलाई नहीं बल्कि शासन व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।
सांसद ने कहा कि यह स्थिति केवल एक कानून तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में नारी वंदन अधिनियम पारित किया, लेकिन उसके प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में अपेक्षित प्रगति आज भी दिखाई नहीं देती। इसी प्रकार लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 बड़े दावों के साथ लाया गया था ताकि पेपर लीक और परीक्षा माफिया पर कठोर अंकुश लगाया जा सके। इसके बावजूद देशभर में परीक्षा संबंधी विवाद और पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रहीं और अब सरकार को उसी कानून में संशोधन की आवश्यकता महसूस हो रही है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि परीक्षा संबंधी कानून का प्रारंभ से ही सख्ती और पारदर्शिता के साथ पालन कराया जाता, तो लाखों विद्यार्थियों का भविष्य संकट में नहीं पड़ता, बार-बार परीक्षाएं रद्द नहीं करनी पड़तीं और युवाओं का व्यवस्था पर विश्वास भी कमजोर नहीं होता। केवल कानून बना देना और बाद में उसके प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी से पीछे हट जाना उचित शासन का उदाहरण नहीं माना जा सकता। सांसद ने कहा कि सरकार ने अनेक मामलों में फास्ट-ट्रैक कार्रवाई और त्वरित न्याय के दावे किए, लेकिन व्यवहार में अनेक महत्वपूर्ण मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। परिणामस्वरूप कई बार न्यायालयों को स्वयं हस्तक्षेप कर सरकारों और प्रशासन से जवाब मांगना पड़ता है। यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि कानून जनता के हित और अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए जाते हैं, न कि केवल घोषणाओं और प्रचार के लिए। इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि वह प्रत्येक पारित कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, जवाबदेही और समयबद्ध समीक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि देश की जनता को केवल नए कानूनों की घोषणा नहीं, बल्कि उनका वास्तविक लाभ मिलना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार की विश्वसनीयता इसी से मजबूत होती है कि वह अपने बनाए कानूनों को पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ लागू करे।
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