
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) के आंदोलन (Protest) को लेकर महाराष्ट्र (Maharashtra) की सियासत में हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को शिवसेना (Shiv Sena) के विधान परिषद सदस्य (MLC) बच्चु कडू ने छत्रपति संभाजीनगर पहुंचकर दीपके से मुलाकात की और उनके आंदोलन की सराहना की। इससे पहले राज्य सरकार में मंत्री संजय शिरसाट भी दीपके और उनके परिवार से मिल चुके हैं तथा उन्हें सुरक्षा देने की मांग उठा चुके हैं।
बच्चु कडू ने स्पष्ट किया कि उनकी यह मुलाकात किसी राजनीतिक दल या सरकार के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि एक आंदोलनकारी के तौर पर दूसरे आंदोलनकारी से मिलने के लिए थी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों के मुद्दों को लेकर किए गए आंदोलन के लिए अभिजीत दीपके बधाई के पात्र हैं।
धमकियों पर जताई चिंता
दीपके को मिल रही कथित धमकियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कडू ने कहा कि भाजपा नेताओं को उन लोगों से बात करनी चाहिए जो धमकी देने और अनुचित व्यवहार करने में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार है और आंदोलन करना किसी भी तरह से अपराध नहीं है।
पहले संजय शिरसाट ने भी की थी मुलाकात
इससे पहले शिवसेना नेता एवं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने दीपके के परिवार से मुलाकात कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि अभिजीत ने छात्रों के हित में एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया है और महाराष्ट्र लौटने पर उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। शिरसाट ने यह भी कहा कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा करेंगे।
परिवार की चिंता और आंदोलन की सराहना
शिरसाट ने बताया कि दीपके के माता-पिता अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, जो स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि पहले परिवार से मुलाकात इसलिए नहीं की गई, क्योंकि इसे राजनीतिक रंग दिया जा सकता था।
मंत्री ने यह भी बताया कि अभिजीत दीपके को अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय से जुड़े अवसरों के बाद नौकरी का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने छात्रों के हित में काम करने का रास्ता चुना और CJP की शुरुआत की। उनके अनुसार, दीपके के माता-पिता चाहते थे कि वह नौकरी करें, जबकि अभिजीत ने सामाजिक आंदोलन का रास्ता अपनाया।
‘राजनीति नहीं, छात्रों के लिए संघर्ष’
शिरसाट ने कहा कि छात्रों के मुद्दों को लेकर हुआ आंदोलन अपनी मांगें पूरी होने के बाद समाप्त हो चुका है, लेकिन इस आंदोलन ने देशभर में नई चर्चा शुरू की। उन्होंने कहा कि अभिजीत का राजनीति से कोई सीधा संबंध नहीं है और उन्होंने आंदोलन का श्रेय लेने की भी कोशिश नहीं की। उनके मुताबिक, समाज के व्यापक समर्थन की वजह से ही यह आंदोलन सफल हो सका।
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