
ग्वालियर: इंसानी भावनाएं और जानवरों के प्रति प्रेम जब पराकाष्ठा पर पहुंचता है, तो पैसों की अहमियत बौनी हो जाती है. ग्वालियर के अलकापुरी इलाके में रहने वाले ओझा परिवार के लिए इन दिनों घर का चूल्हा तक ठीक से नहीं जल पा रहा है. वजह है उनके घर की सबसे लाडली और दुलारी सदस्य ‘शकुंतला’ का अचानक गायब हो जाना. शकुंतला कोई इंसान नहीं, बल्कि एक बेहद समझदार और अनूठी मादा तोता है, जिसकी जुदाई ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
शकुंतला एक बेहद समझदार हरे रंग की मादा तोता है, जिसके सिर पर ग्रे और लाल रंग का एक अनूठा तिलक जैसा निशान है. सोमवार को घर की खिड़की खुली रह जाने के कारण शकुंतला अचानक उड़ गई. कई दिन बीत जाने के बाद भी जब वह वापस नहीं लौटी, तो परिवार में हड़कंप मच गया. तोते के बिछड़ने के गम में परिवार की बुजुर्ग दादी और नन्हीं पोती का रो-रोकर बुरा हाल है, दोनों की आँखें बस घर के मुख्य दरवाजे पर ही टिकी हुई हैं.
अपने जिगर के टुकड़े को वापस पाने के लिए ओझा परिवार ने ज़मीन-आसमान एक कर दिया है. शहर के मुख्य बाज़ारों और कॉलोनियों में ई-रिक्शा घुमाया जा रहा है. ई-रिक्शा चालक सोनू सुबह से शाम तक सड़कों पर लाउडस्पीकर के ज़रिए लाडली शकुंतला की खोज के लिए लोगों से मदद की गुहार लगा रहा है. इस खोज अभियान और मुनादी पर परिवार अब तक करीब 15 हजार रुपये खर्च कर चुका है.
करीब एक साल पहले शकुंतला ओझा परिवार के जीवन में आई थी और अपनी मासूमियत से सबका दिल जीत लिया था. परिवार ने उसे कभी लोहे के पिंजरे में कैद नहीं रखा. वह पूरे घर में आज़ादी से उड़ती थी, लोगों के कंधों पर बैठती थी और चहकती थी. परिवार के सदस्य अनिल ओझा का कहना है कि हमारे लिए 50,000 की रकम मायने नहीं रखती, हमारी असली दौलत शकुंतला है. उसके वापस आने पर ही मां और बेटी के चेहरे की मुस्कान लौटेगी.
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