
नई दिल्ली। सरकार द्वारा सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स में की गई भारी बढ़ोतरी का असर अब देश की प्रमुख सिगरेट कंपनियों के प्रदर्शन पर साफ दिखाई देने लगा है। नया टैक्स सिस्टम लागू होने के बाद चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में आईटीसी, गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया और वीएसटी इंडस्ट्रीज के शुद्ध राजस्व, बिक्री मात्रा और मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई है। इन तीनों कंपनियों की देश के सिगरेट बाजार में 90 प्रतिशत से ज्यादा की हिस्सेदारी है। बाजार के अलग-अलग अनुमानों के अनुसार, भारत में सिगरेट की सालाना खपत करीब 100-120 अरब स्टिक के आसपास है।
सरकार ने इस साल फरवरी में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी को बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया था। इसके साथ ही पुराने मुआवजा उपकर की जगह सिगरेट की लंबाई के आधार पर नया एडिशनल एक्साइज ड्यूटी सिस्टम लागू किया गया, जो प्रति 1,000 सिगरेट पर 2,100 रुपये से 8,500 रुपये तक है। हालांकि, टैक्स में बढ़ोतरी के बाद कंपनियों की बिक्री से प्राप्त कुल आय में बढ़ोतरी दिखाई दी, लेकिन वास्तविक या शुद्ध राजस्व पर इसका नकारात्मक असर पड़ा। कंपनियों को बढ़े हुए टैक्स का बोझ कीमतों में समायोजित करने, बिक्री मात्रा बनाए रखने और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बदलाव करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
देश की टॉप सिगरेट कंपनी आईटीसी ने जून तिमाही में अपने सिगरेट कारोबार से ऑपरेशनल रेवेन्यू में 73.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की। ये बढ़कर 16,596.67 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ये 9,553.86 करोड़ रुपये था। कंपनी ने बताया कि टैक्स में भारी बढ़ोतरी की वजह से सिगरेट की कीमतों में किए गए बदलाव की वजह से ऑपरेशनल रेवेन्यू में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, उत्पादों की बिक्री से मिलने वाला वास्तविक राजस्व 31.45 प्रतिशत घटकर 3,769.11 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में ये 5,498.93 करोड़ रुपये था। आईटीसी ने कहा कि उसकी सिगरेट यूनिट ने सभी हितधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक और संतुलित कदम उठाए हैं। कंपनी के प्रमुख ब्रांड में इंडिया किंग्स, इंसिग्निया, क्लासिक, गोल्ड फ्लेक, विल्स नेवी कट, कैप्सटन और प्लेयर्स शामिल हैं।
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