
– शराब की बिक्री पर प्रतिबंध के बाद दो कंपनियों ने सभी नियमों के पालन करने और मौजूदा स्टॉक के लेबल पर भी सही जानकारी प्रदर्शित करने पर सहमति जताई
– कंपनियों के आग्रह पर एफएसएसएआई ने सशर्त बिक्री पर लगाई रोक को हटाया
– 30 नवंबर तक ही मौजूदा स्टॉक बेचने की अनुमति, 1 दिसंबर से नए लेबल के साथ बिक्री करना होगी
इंदौर, विकाससिंह राठौर। रम और व्हिस्की के नाम पर उनके फ्लेवर का इस्तेमाल कर शराब बनाने के मामले में एफएसएसएआई की कार्रवाई के बाद संबंधित कंपनियां अब झुकती नजर आ रही हैं। इंदौर में निर्मित छह शराब ब्रांड्स पर बिक्री प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इनमें से दो कंपनियों यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड और इनब्रू बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड ने एफएसएसएआई को पत्र लिखकर सभी नियमों का पालन करने की सहमति दी है। कंपनियों ने मौजूदा स्टॉक को भी सही जानकारी के साथ बेचने के लिए विशेष अनुमति मांगी थी। इसके बाद एफएसएसएआई ने दोनों कंपनियों के संबंधित ब्रांड्स पर लगी बिक्री रोक हटा दी है, लेकिन यह अनुमति विशेष शर्तों के साथ दी गई है।
मौजूदा स्टॉक पर फ्लेवर वाली शराब की जानकारी देना होगी
कंपनियों ने एफएसएसएआई को बताया कि वे मौजूदा स्टॉक को बाजार में बेचने के लिए पैकिंग पर सही जानकारी प्रदर्शित करेंगी। इसके लिए मौजूदा लेबल के ऊपर इंक प्रिंटिंग के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाएगा कि उत्पाद फ्लेवर्ड स्पिरिट है। यानी जिस शराब में रम या व्हिस्की का फ्लेवर मिलाया गया है, उसे केवल रम या व्हिस्की के नाम से प्रस्तुत करने के बजाय उसकी वास्तविक प्रकृति की जानकारी उपभोक्ताओं को दी जाएगी। एफएसएसएआई ने कंपनियों के इस आग्रह को स्वीकार करते हुए मौजूदा स्टॉक की सशर्त बिक्री की अनुमति दी है। हालांकि, यह छूट सिर्फ 30 नवंबर 2026 तक के लिए है। इसके बाद कंपनियों को नए नियमों के अनुसार संशोधित लेबल के साथ ही शराब की बिक्री करनी होगी।
1 दिसंबर से नए लेबल के साथ करना होगी बिक्री
एफएसएसएआई के निर्देशों के अनुसार, 1 दिसंबर से संबंधित कंपनियों को शराब के पैक पर उत्पाद की सही पहचान स्पष्ट करनी होगी। यदि उत्पाद में फ्लेवर का इस्तेमाल किया गया है तो लेबल पर रम फ्लेवर्ड स्पिरिट या व्हिस्की फ्लेवर्ड स्पिरिट जैसी स्पष्ट जानकारी देनी होगी। वहीं, निर्धारित मानकों के अनुरूप मूल रम या व्हिस्की होने पर ही उसे रम या व्हिस्की के रूप में बनाया और बेचा जा सकेगा। इस तरह मौजूदा स्टॉक को लेकर कंपनियों को मिली अनुमति का उद्देश्य बिक्री को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को उत्पाद की सही जानकारी उपलब्ध करवाना है।
कंपनियां रिफॉर्मूलेशन पर भी कर रहीं काम
दोनों कंपनियों ने एफएसएसएआई को यह भी बताया है कि वे अपने उत्पादों की रिफॉर्मूलेशन प्रक्रिया पर भी काम कर रही हैं। इसका उद्देश्य आने वाले समय में उपभोक्ताओं को फ्लेवर के बजाय मूल व्हिस्की और रम उपलब्ध कराना है। यानी उम्मीद है कि आने वाले समय में रम और व्हिस्की लिखी बोतलों में इनके फ्लेवर की शराब के बजाए असली रम और व्हिस्की मिल सकेगी। वहीं अगर किसी उत्पाद में फ्लेवर का इस्तेमाल जारी रहता है तो उसकी पैकिंग पर इसका स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा, ताकि ग्राहक यह समझ सकें कि वह मूल रम या व्हिस्की नहीं, बल्कि फ्लेवर्ड स्पिरिट खरीद रहे हैं।
एसोसिएटेड अल्कोहल्स का मामला कोर्ट में विचाराधीन
इंदौर की तीसरी कंपनी एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रुअरीज लिमिटेड के दो शराब ब्रांड्स पर लगी रोक का मामला अभी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में विचाराधीन है। कंपनी की याचिका पर हाईकोर्ट पहले ही बिक्री प्रतिबंध आदेश पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा चुका है। मामले में कोर्ट ने एफएसएसएआई को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे। लेकिन एफएसएसएआई ने अब तक इस मामले में कोर्ट के समक्ष अपना जवाब पेश नहीं किया है। प्राधिकरण का जवाब दाखिल होने के बाद ही मामले में आगे की सुनवाई और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
अग्निबाण ने देश में सबसे पहले किया था खुलासा
अग्निबाण ने देश में सबसे पहले रम और व्हिस्की के नाम पर उनके फ्लेवर का इस्तेमाल कर शराब बनाए जाने का खुलासा किया था। 10 जुलाई को प्रकाशित खबर में ओल्ड मोंक की पैकिंग पर सात वर्ष पुरानी रम के दावे और उसमें फ्लेवर के इस्तेमाल के आधार पर बिक्री पर लगी रोक का मामला उठाया था। इसके बाद इंदौर समेत देश की अन्य कंपनियों के सैंपल फेल होने और बिक्री प्रतिबंध की खबरें भी अग्निबाण ने लगातार प्रकाशित कीं।
एफएसएसएआई की बड़ी जीत
एफएसएसएआई की कार्रवाई के बाद कंपनियों द्वारा लेबलिंग नियमों का पालन करने और उत्पादों की सही जानकारी देने पर सहमति जताना इस पूरे मामले में एफएसएसएआई कि उपभोक्ताओं के हित में एक बड़ी जीत मानी जा रही है। प्राधिकरण की आपत्ति मुख्य रूप से इस बात को लेकर थी कि फ्लेवर मिलाए गए उत्पादों को रम और व्हिस्की के नाम से बेचा जा रहा था। अब अगर कंपनियां निर्धारित शर्तों के अनुसार लेबलिंग करती हैं तो उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति की जानकारी मिल सकेगी।
ओल्ड मोंक को महाराष्ट्र में नहीं मिली राहत
देश में इस मामले की सबसे पहली कार्रवाई महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खोपोली स्थित फैक्टरी में जांच के बाद ओल्ड मोंक के तीन अलग-अलग वैरिएंट पर की गई थी। इसके बाद महाराष्ट्र में ओल्ड मोंक की बिक्री पर रोक लगा दी गई। इस कार्रवाई के खिलाफ कंपनी मुंबई हाईकोर्ट पहुंची, लेकिन अब तक उसे अंतरिम राहत नहीं मिली है। सुनवाई के दौरान कंपनी ने इंदौर की कंपनियों की तरह पैकिंग में सुधार का आश्वासन दिया है। एफएसएसएआई ने भी कोर्ट में कहा है कि फ्लेवर के इस्तेमाल वाले उत्पाद को केवल रम के रूप में नहीं बेचा जा सकता।
इंदौर में इन तीन कंपनियों के 6 शराब ब्रांड के सैंपल हुए थे फेल
– यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड
– एंटिक्विटी ब्लू व्हिस्की
– रॉयल चैलेंज व्हिस्की
एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रुअरीज लिमिटेड
– सेंट्रल प्रोविंस सुपीरियर ग्रेन व्हिस्की
– मैकडॉवेल्स नं. 1 सेलिब्रेशन मैच्योर्ड ङ्गङ्गङ्ग रम
इनब्रू बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड
– बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की
– ओल्ड कास्क डीलक्स ङ्गङ्गङ्ग रम
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