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राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त

August 03, 2026

अयोध्या। अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) में दान चोरी की घटना के बाद से मची उथल-पुथल थम नहीं रही है। चंपतराय (Champat Rai), डॉ. अनिल मिश्र (Dr. Anil Mishra) और गोपाल राव (Gopal Rao) के हटने के बाद अब संगठन संरक्षक के तौर पर राम मंदिर के पालक नियुक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी भैयाजी जोशी (Bhaiyaji Joshi) भी दायित्व से मुक्त कर दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो पालक की जिम्मेदारी के लिए दूसरे बड़े और कद्दावर चेहरे की तलाश शुरू हो चुकी है। इसमें दिल्ली के वरिष्ठ प्रचारक का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।

संघ का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर अंतर्द्वंद्व में फंसा है। इस विषय पर संघ का थिंक टैंक दो खेमों में बंट गया है। एक खेमा राम मंदिर मामलों से संघ को दूर रखने का हिमायती है तो दूसरा वकालत कर रहा है कि मंदिर पर संगठन का अंकुश जरूरी है। इसके पीछे दोनों खेमों के अपने-अपने तर्क हैं। इस कारण पालक का नाम घोषित करने में देरी हो रही है।


  • ट्रस्ट की बैठकों में हमेशा शामिल होते रहे
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन और जमीन खरीद फरोख्त को लेकर हुए विवाद के बाद संघ नेतृत्व ने सर कार्यवाह पद से स्वास्थ्य कारणों से सेवामुक्त हुए भैयाजी जोशी को राम मंदिर का पालक नियुक्त कर उनका केंद्र लखनऊ तय किया था। इसके कारण वह प्रायः ट्रस्ट की बैठकों में शामिल होते थे।

    चंपत राय के लेटर बम से चिंतित था नेतृत्व
    चढ़ावा चोरी की घटना के दौरान भी मंदिर पालक का नाम चर्चा में आया, लेकिन उनका कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया। फिर भी 12 जून को लखनऊ में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में वह शामिल रहे। इसके पहले छह जून को चढ़ावा चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराने गए चंपतराय को रोकने में उनका हाथ होने की आशंका जताई गई मगर यह पुष्ट नहीं हो सका। अब पालक के पद से मुक्ति को उसी घटना से जोड़ा जा रहा है। खास बात यह भी है कि एफआईआर न कराने की वजह ही चंपत राय के त्यागपत्र का सबसे प्रमुख कारण थी।

    छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के ऐलान के बाद सात जुलाई को चंपतराय ने लेटर बम फोड़ा था। इस लेटर के जरिए चंपतराय ने चढ़ावा गिनती के अनुबंध से सम्बन्धित जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने उस पत्र में कहा था कि फिलहाल मैं मौन हूं लेकिन एसआईटी की जांच के बाद हर सवाल का उत्तर दूंगा। उन्होंने कहा कि कलंक लेकर नहीं जाऊंगा। उनके इस ऐलान से शीर्ष नेतृत्व चिंतित था कि कहीं कोई नया बखेड़ा न खड़ा हो जाए, इसीलिए उन्हें मनाने की कोशिशें हुईं। संतों को भी उनके समर्थन में कर उन्हें दिलासा दी गई।

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