
नई दिल्ली ।उम्र बढ़ने (Aging) के साथ किसी का नाम तुरंत याद न आना, सामान रखने के बाद उसे भूल (Forgetfulness) जाना या किसी तारीख को याद करने में थोड़ा अधिक समय लगना सामान्य हो सकता है। उम्र के साथ शरीर में होने वाले बदलावों में दिमाग की कार्यक्षमता (Brain Function) में बदलाव (Brain Function Changes) भी शामिल है। इसलिए परिवार के लोग कई बार बुजुर्गों (Elderly) में होने वाली हर तरह की भूल को उम्र का सामान्य असर (Normal Effects Of Aging) मान लेते हैं।
हालांकि, हर तरह की भूल को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। 60 वर्ष की उम्र के बाद अल्जाइर रोग और डिमेंशिया के मामले बढ़ सकते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि सामान्य उम्र संबंधी भूल और डिमेंशिया से जुड़ी याददाश्त की समस्या में क्या अंतर होता है।
उम्र बढ़ने के साथ दिमाग की काम करने की गति कुछ धीमी हो सकती है। किसी परिचित व्यक्ति का नाम तुरंत याद न आना, कोई वस्तु कहां रखी है यह कुछ देर बाद याद आना या किसी तारीख को याद करने में समय लगना ऐसी स्थितियां हो सकती हैं, जिनके बावजूद व्यक्ति अपने रोजमर्रा के काम सामान्य रूप से कर पाता है।
इसके विपरीत डिमेंशिया में समस्या केवल याददाश्त तक सीमित नहीं रहती। इसमें सोचने, समझने, निर्णय लेने, भाषा और ध्यान जैसी क्षमताएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इसका असर धीरे-धीरे व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों पर दिखाई देने लगता है।
बार-बार एक ही सवाल पूछना ऐसा संकेत हो सकता है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। इसी तरह परिचित जगहों पर रास्ता भूल जाना, बातचीत के दौरान सामान्य शब्द याद न आना या बिल और पैसों का हिसाब संभालने में परेशानी होना भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
कुछ मामलों में व्यक्ति के व्यवहार या व्यक्तित्व में बदलाव भी दिखाई दे सकता है। यदि इस तरह के लक्षण लगातार बने रहें और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो इसे केवल उम्र से जुड़ी सामान्य भूल मानने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
हालांकि, याददाश्त कमजोर होने का मतलब हमेशा डिमेंशिया नहीं होता। इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। नींद से जुड़ी समस्या, तनाव और डिप्रेशन याददाश्त को प्रभावित कर सकते हैं। थायरॉइड की बीमारी और विटामिन बी12 जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी ऐसी समस्याओं से जुड़ी हो सकती है।
इसलिए बुजुर्ग व्यक्ति में अचानक या बढ़ती हुई याददाश्त की समस्या दिखाई देने पर तुरंत उसे डिमेंशिया मान लेना उचित नहीं है। समस्या के संभावित कारणों की पहचान करना जरूरी है, क्योंकि याददाश्त प्रभावित करने वाली कुछ स्थितियों का इलाज संभव हो सकता है।
याददाश्त में कमी से जुड़े लक्षणों को समझते समय यह देखना महत्वपूर्ण है कि समस्या कितनी बार हो रही है और क्या उसका असर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। सामान्य भूल में व्यक्ति आमतौर पर अपनी दैनिक गतिविधियां संभाल सकता है, जबकि डिमेंशिया में सोचने और निर्णय लेने जैसी अन्य क्षमताओं के प्रभावित होने के साथ दैनिक काम भी मुश्किल हो सकते हैं।
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